नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के आगामी सत्र और अहम विधेयकों को लेकर एनडीए का दायरा लगातार बढ़ाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने हाल ही में एनडीए के साथ आए 45 सांसदों को नाश्ते पर बुलाया। इस बैठक में एनसीपीआई (NCPI), शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले गुट), राष्ट्रीय लोकमोर्चा, AIADMK और UPPL के सांसद शामिल हुए। सबसे ज्यादा चर्चा NCPI के उन 20 सांसदों की रही, जो हाल ही में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनडीए में आए हैं।
NCPI के मुस्लिम सांसद भी हुए बैठक में शामिल
NCPI के 20 सांसदों में 3 मुस्लिम सांसद खलील-उर-रहमान, अबु ताहेर खान और यूसुफ पठान भी शामिल रहे। इससे पहले ये तीनों एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक में शामिल नहीं हुए थे और कहा जा रहा था कि वे NDA में सहज नहीं हैं। हालांकि इस बार तीनों प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। बैठक के बाद यूसुफ पठान ने कहा कि NCPI के सदस्य होने के नाते वे देशहित में आने वाले हर विधेयक का समर्थन करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने SIR के दौरान लंबित मतदाताओं के नाम जल्द जोड़ने और पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की शिकायतों पर भी केंद्र से चर्चा की। सरकार ने कानून के दायरे में रहकर इन मुद्दों पर विचार करने का भरोसा दिया है।
बिल पास कराने के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी
सरकार की यह कवायद संसद में संख्या बल मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पिछली बार महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक पर सरकार को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था। उस समय बिल के समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे, जबकि ऐसे विधेयक को पारित कराने के लिए करीब 360 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। अब एनडीए को तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 6 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद सरकार के पक्ष में 324 सांसद बताए जा रहे हैं। यदि डीएमके के 22 और YSR कांग्रेस के 4 सांसदों का साथ मिलता है तो यह संख्या 350 तक पहुंच सकती है।
एकनाथ शिंदे ने भी पीएम मोदी से की मुलाकात
इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी दिल्ली पहुंचे और पहले उनकी पार्टी के सांसदों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद शिंदे ने भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ अलग से बैठक की। शिंदे ने बताया कि बैठक में महाराष्ट्र के विकास, संसद में आने वाले विधेयकों और शिवसेना सांसदों की भूमिका पर चर्चा हुई। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे सभी दलों के सहयोग से पारित होना चाहिए। साथ ही उन्होंने परिसीमन बिल का समर्थन करते हुए कहा कि आज कई लोकसभा क्षेत्रों में 25 से 30 लाख मतदाता हैं, ऐसे में सांसदों के लिए प्रभावी ढंग से काम करना मुश्किल हो जाता है।
बादल और पीएम की मुलाकात से मची सियासी हलचल
राजनीतिक हलचल के बीच शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। आधिकारिक तौर पर उन्होंने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर चर्चा की बात कही, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी और अकाली दल के बीच फिर से गठबंधन की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। माना जा रहा है कि यदि दोनों दल दोबारा साथ आते हैं तो अकाली दल एनडीए में वापसी कर सकता है, परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकता है और पंजाब विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ सकता है।
समर्थन जुटाने के लिए सरकार क्यों लगा रही जोर?
प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की मुलाकात पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्या बीजेपी और अकाली दल फिर से गठबंधन करने जा रहे हैं। दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषण यह मान रहे हैं कि सरकार चरणबद्ध तरीके से अपने सहयोगियों का दायरा बढ़ा रही है ताकि भविष्य में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े संवैधानिक विधेयकों को पर्याप्त समर्थन मिल सके। नए संसद भवन में लोकसभा की क्षमता भी भविष्य में सीटें बढ़ाने की संभावना को ध्यान में रखकर बनाई गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार सही समय आने पर इन अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
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