पीएम मोदी ने शुक्रवार को एनडीए सांसदों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने संकेत दिए कि सरकार के पास परिसीमन बिल पास कराने के लिए पर्याप्त समर्थन है। सूत्रों के अनुसार इसी महीने विशेष सत्र लाया जा सकता है, जिसमें परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को पास कराया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने संकेत दिए कि परिसीमन को लेकर सरकार के पास पर्याप्त समर्थन है। 366 सांसदों की संख्या जुटा ली गई है। अभी संभव नहीं हुआ तो विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर आगे बढ़ा जा सकता है। इसी महीने विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। सांसदों से कहा गया कि परिसीमन की प्रक्रिया में उनके निर्वाचन क्षेत्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार डीएमके ने भी एनडीए का साथ देने के लिए तीन शर्तें रखी हैं।
बैठक में सांसदों से कहा गया कि वे Gen-Z और युवाओं के बीच लगातार सक्रिय रहें। सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दें। युवाओं की नाराजगी और सरकार के प्रति नकारात्मकता को संवाद के जरिए कम करने का प्रयास करें।
शिवसेना (शिंदे) गुट के सांसदों को खतरा नहीं
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने शिवसेना (शिंदे) के सांसदों से कहा कि पार्टी से जुड़े सभी निर्णय संविधान के दायरे में लिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद उनकी सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों या केंद्र सरकार से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सांसद सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय या प्रधानमंत्री से संपर्क कर सकते हैं। इस बैठक में शिवसेना (शिंदे गुट) के 7 सांसद शामिल हुए। वहीं, एनसीपीआई के 20 और एनसीपी (अजित पवार) के सांसद इस मीटिंग का हिस्सा बने। उपेंद्र कुशवाहा समेत करीब 45 सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नाश्ते पर बैठक की।
विकास कार्यों पर जोर
प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास के लिए सत्ता का प्रभावी ढंग से उपयोग करें। किसी भी विकास परियोजना में दिक्कत आने पर सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क करें। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबाळकर के योगाभ्यास और स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वस्थ रहेंगे तभी देश की बेहतर सेवा कर पाएंगे। उन्होंने सांसदों को नियमित योग, व्यायाम और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी। इसके अलावा पीएम ने जनता के बीच रहने की सलाह देते हुए कहा कि गरीब, मजदूर और किसानों से लगातार मिलें। उनकी समस्याएं सुनें और समाधान के लिए प्रयास करें।
हमेशा अपडेटेड रहें
सांसदों से कहा गया कि वे हर विषय पर अपडेट रहें और बदलते राजनीतिक व सामाजिक माहौल को समझें। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले पूर्वोत्तर राज्यों का अपेक्षित विकास नहीं हुआ था। अब पूरे देश के साथ-साथ पूर्वोत्तर को भी विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एनडीए में किसी दल का महत्व उसके सांसदों की संख्या से नहीं तय होता। एक सांसद वाले दल को भी उतना ही सम्मान और महत्व दिया जाता है, जितना बड़े दलों को। सभी सहयोगी दलों के साथ मिलकर एनडीए को और मजबूत करने का आह्वान किया।
संसद की कार्यवाही पर चिंता जताई
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है और उसकी कार्यवाही सुचारु रूप से चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार हंगामे के कारण नए सांसदों को सदन में बोलने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने संसद चलाने के लिए विपक्ष से भी बातचीत की है, लेकिन हंगामे के कारण न विपक्ष के सांसद बोल पा रहे हैं और न ही सत्ता पक्ष के सांसद।
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