शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत मुश्किल में फंस गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संजय राउत को आदेश दिया है कि वह 17 नवंबर को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट के समक्ष पेश हों। सामने आई जानकारी के अनुसार, संजय राउत को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) और न्यायपालिका के बारे में की गई टिप्पणियों से जुड़े अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने दायर की याचिका
PTI की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम.पंचोली की बेंच ने पत्रकार निखिल वागले को भी डिजिटल माध्यम से उसी दिन कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीते 16 अक्तूबर को सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से राहत दे दी थी। आपको बता दें कि कारण बताओ नोटिस सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से दायर की गई अवमानना याचिका पर जारी किया गया था। (इनपुट: भाषा)
बयान को लेकर विवादों में घिरे थे संजय राउत
आपको बता दें कि संजय राउत हाल ही में यूरोप में जारी हिंसा को लेकर दिए गए बयान को लेकर विवादों में आ गए थे। बीते कुछ समय से यूरोप के कई देशों में हिंसा का दौर चल रहा है। अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने अपनी देश के सुप्रीम कोर्ट को आग लगा दी थी। संजय राउत ने इस घटना का वीडियो अपने अपनी टाइमलाइन पर शेयर किया था। उन्होंने भारत को इस घटना से सबक लेने की सलाह तक दे डाली थी। संजय राउत ने कहा कि अल्बानिया के लोगों के गुस्से का शिकार सुप्रीम कोर्ट इसलिए बना क्योंकि वो करप्ट प्रधानमंत्री का बचाव कर रहा था। इतना ही नहीं, संजय राउत ने अपने पोस्ट में लिखा कि अल्बानिया में संसद से लेकर मंत्रियों के घरों को भीड़ निशाना बना रही है। संजय राउत ने कहा था कि भारत में युवाओं ने अब तक संयम बनाए रखा है और सरकार को इसके लिए उनका आभार मानना चाहिए।
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