देश की सियासत में आज का दिन बेहद अहम है। आज चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। चुनावी अनियमितताओं और SIR की प्रक्रिया सहित चीफ इलेक्शन कमिश्नर के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए ये याचिका दाखिल की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को जोड़ते हुए एक साथ सुनवाई का फैसला किया है, जिन याचिकाओं को मंजूर किया गया है, उनमें कुल 11 याचिकाकर्ता हैं।
राहुल गांधी समेत इन लोगों ने डाली याचिका
याचिका में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के साथ इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी के अलावा मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत राय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, M.A बेबी, D राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और E.T मोहम्मद बशीर हैं।
चुनाव आयोग ने भी दाखिल किया हलफनामा
एक तरफ आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के खिलाफ दाखिल तमाम याचिकाओं पर सुनवाई होनी है, तो वहीं दूसरी तरफ अदालत में सुनवाई से ठीक पहले चुनाव आयोग ने एक कड़ा हलफनामा दाखिल कर दिया है। इस जवाब में चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि कांग्रेस और दूसरे पेटिशनर्स ने SIR से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों पर जो सवाल उठाए गए हैं, वो न्यूज पेपर्स की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, तथ्यों से परे हैं।
तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिए फैसले
इलैक्शन कमीशन के एफीडेविट में कहा गया है कि चुनाव आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिए। कोई फैसला एक तरफा नहीं लिया गया। आयोग की तरफ से कहा गया है कि किसी भी वोटर का नाम ERO की सहमति के बाद ही जोड़ा या हटाया जा सकता है। फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
चुनाव आयोग ने कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा है कि अनमैप्ड मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं है। BLO घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। चुनाव आयोग के इस हलफनामे ने विपक्ष के उन तमाम हथियारों को कुंद कर दिया है, जिसके जरिए वे सीईसी ज्ञानेश कुमार और पूरी चुनाव संस्था के खिलाफ एक मुहिम चला रहे थे। अब विपक्ष इसे केन्द्र सरकार के दबाव वाला हलफनामा करार दे रहा है।
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