लद्दाख में पानी की कमी से जूझ रहे कृषि क्षेत्रों के लिए बड़ी पहल सामने आई है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना की पहल से ग्लेशियर से निकलकर सिंधु नदी में बह जाने वाला करीब 9 करोड़ लीटर पानी रोजाना अब खेती के काम आएगा। इस पानी को नहरों के जरिए करीब 13 गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे 1500 एकड़ से अधिक सूखी और बंजर कृषि भूमि की सिंचाई में मदद मिलेगी।
बड़ी मात्रा में बर्बाद होता था ग्लेशियर का पानी
दरअसल, लद्दाख में ग्लेशियर और बर्फ पिघलने से बड़ी मात्रा में पानी उपलब्ध होता है, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण इसका बड़ा हिस्सा बिना इस्तेमाल के सिंधु नदी में चला जाता था। दूसरी ओर, कई गांवों की कृषि भूमि पानी की कमी के कारण सूखी पड़ी रहती थी। इसी समस्या को देखते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने विभिन्न गांवों के दौरे के दौरान ऐसे जलस्रोतों की पहचान करने की पहल की, जहां ग्लेशियर का पानी बड़ी मात्रा में बहकर बर्बाद हो रहा था।
रोजाना 9 करोड़ लीटर पानी बहकर जाता था सिंधु नदी में
इसी क्रम में लेह के स्टोक गांव के नाले से निकलने वाले पानी को मौजूदा नहरों में मोड़ने की योजना बनाई गई। स्टोक नाला स्टोक कांगड़ी ग्लेशियर से आने वाले पानी से पोषित होता है। आकलन के मुताबिक इस नाले से करीब 90 मिलियन लीटर यानी 9 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन बहकर सिंधु नदी में जा रहा था।
दो दिन में तैयार किए चैनल
उपराज्यपाल के निर्देश पर सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने 14 अगस्त को जेसीबी की मदद से स्टोक नाले में दो चैनल बनाए। इनके जरिए पानी को इगू-पेह नहर की ओर मोड़ा गया। करीब 200 मीटर लंबे इन चैनलों को तैयार करने में केवल लगभग 10 हजार रुपये की मशीनरी लागत आई। इसके लिए किसी बड़े पूंजीगत खर्च की जरूरत नहीं पड़ी।
करीब 8 करोड़ लीटर पानी इगू-पेह नहर में पहुंचाया गया। इसमें लगभग 6.2 करोड़ लीटर पानी इगू गांव की ओर और करीब 1.8 करोड़ लीटर पानी पेह गांव की ओर भेजा गया। इससे नहर में पानी का प्रवाह करीब 50 क्यूसेक से बढ़कर 90 क्यूसेक तक पहुंच गया।
Image Source : Reporter Inputइस तरह बनाई गई नहरें
इस नहर से जुड़े 12 गांवों को अब रोजाना पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। पहले पानी की सीमित उपलब्धता के कारण गांवों में सिंचाई के लिए बारी-बारी से पानी दिया जाता था।
चूचोट की सूखी नहर में भी पहुंचा पानी
इगू-पेह नहर में पानी पहुंचाने के बाद बचे करीब 1 करोड़ लीटर पानी को चूचोट गांव की एक सूखी नहर में मोड़ा गया। यह नहर इगू-पेह नहर से करीब 500 फीट नीचे है। इससे चूचोट और आसपास के क्षेत्रों की लगभग 500 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है।
एलजी ने चूचोट गांव का किया था दौरा
उपराज्यपाल ने 16 अगस्त को चूचोट गांव का दौरा किया था। इस दौरान गांव के गोबा/नंबरदार मिर्जा हुसैन ने ग्रामीणों की ओर से पानी की गंभीर समस्या के समाधान की मांग की थी।
Image Source : Reporter Inputकाम का मुआयाना करते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना
खास बात यह है कि 43 किलोमीटर लंबी इगू-पेह नहर का निर्माण 1979 में शुरू होकर 2005 में पूरा हुआ था। नहर के करीब 200 मीटर हिस्से को भूमिगत बनाया गया था, ताकि स्टोक नाले का पानी उसके ऊपर से गुजर सके। हालांकि, दशकों तक इस जलस्रोत का उपयोग सिंचाई के लिए नहीं किया गया।
किसानों को होगा खासा लाभ
अब महज दो दिनों में चैनल बनाकर ग्लेशियर के पूरे 9 करोड़ लीटर दैनिक प्रवाह को उपयोगी बना दिया गया है। इससे किसानों को बेहतर सिंचाई, संभावित रूप से अधिक फसल उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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