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लद्दाख के एलजी विनय सक्सेना ने जारी किया 100 दिन का रिपोर्ट कार्ड, पानी समस्या सुलझाई, पर्यटन को बढ़ावा दिया

 Published : Jul 12, 2026 11:01 pm IST,  Updated : Jul 12, 2026 11:01 pm IST

विनय सक्सेना ने रिपोर्ट कार्ड में बताया है कि पद संभालने के बाद उन्होंने किन समस्याओं पर काम किया है। उन्होंने पानी की समस्या खत्म करने और टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कही है।

Vinai Saxena- India TV Hindi
लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना Image Source : X/@LG_LADAKH

लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को अपने कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। इसमें उन्होंने बताया कि पिछले 100 दिनों में उन्होंने विकास, जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, शासन सुधार और रोजगार सृजन पर जोर दिया। रिपोर्ट में उन्होंने यह भी बताया है कि इन दौरान हालात किस तरह बदले हैं। विनय सक्सेना ने 13 मार्च को लद्दाख के उपराज्यपाल का पद संभाला था। इसके बाद से उन्होंने इन चीजों पर काम किया है।

इस रिपोर्ट का नाम "लद्दाख के लिए साझा दृष्टिकोण का निर्माण" रखा गया है। इसमें उन छह क्षेत्रों के बारे में बताया गया है, जिन पर सरकार ने ज्यादा ध्यान दिया है। ये छह क्षेत्र दीर्घकालिक जल सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता, सांस्कृतिक और पर्यटन पुनर्जागरण, सामाजिक न्याय और सुरक्षा, रोजगार और अर्थव्यवस्था, और टिकाऊ बुनियादी ढांचा हैं।

जल सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा

वीके सक्सेना की अगुआई में प्रशासन का सबसे अहम लक्ष्य हिम सरोवर परियोजना और सिंधु जल समृद्धि अभियान जैसी परियोजनाओं के माध्यम से लद्दाख में जल संकट का समाधान करना रहा है। हिम सरोवर परियोजना के पहले चरण के तहत, बर्फ पिघलने और बारिश के पानी को इकट्ठा करने के लिए 50 सामुदायिक जल निकाय विकसित किए जा रहे हैं, जबकि सिंचाई और दीर्घकालिक जल उपलब्धता में सुधार के लिए सिंधु नदी पर भारत का पहला हिमालयी रॉक चेक डैम बनाया गया है। प्रशासन ने 43 किलोमीटर लंबी इगू-फे सिंचाई नहर को भी पुनर्जीवित किया, जिससे लगभग 4,500 हेक्टेयर कृषि भूमि को लाभ हुआ।

पर्यावरण, पर्यटन पर भी जोर

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पहले 100 दिनों के दौरान 35,000 से अधिक पेड़ लगाए गए। इसके साथ ही सिंधु नदी हरित गलियारा पहल की शुरुआत हुई। खराब हो चुके वन क्षेत्रों का जीर्णोद्धार किया गया। ऊंचाई वाले प्रायोगिक वृक्षारोपण का निर्माण हुआ और सिंगल यूज प्लास्टिक और पारिस्थितिक उल्लंघनों के खिलाफ सख्त उपाय किए गए। रिपोर्ट में पर्यटन को बढ़ावा देने और लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया है। इनमें भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी शामिल है, जिसे 1.18 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा। भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क की स्थापना, वार्षिक लद्दाख बाइक वीक, उच्च ऊंचाई वाले फूलों के खेत और पर्यटन अवसंरचना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए सुधार भी इसमें शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के बीच पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 43.65 प्रतिशत बढ़ी है।

शासन और आर्थिक सुधार

सामाजिक क्षेत्र में प्रशासन ने पांच नए जिलों का सृजन किया है। इसके अलावा लंबे समय से लंबित भूमि पट्टों का नवीनीकरण, दैनिक वेतन भोगियों के वेतन में संशोधन, सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार और केंद्र शासित प्रदेश में अधिक डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए स्वास्थ्य सेवा सुधारों सहित कई उपायों की घोषणा की गई। रिपोर्ट में होटलों और गेस्ट हाउसों को उद्योग का दर्जा देना, सिंगल-विंडो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और जॉब पोर्टल लॉन्च करना, लद्दाख पश्मीना विकास बोर्ड का गठन करना, खुबानी के निर्यात को बढ़ावा देना और मॉडल सीमावर्ती ग्राम परियोजनाओं की शुरुआत करना जैसे आर्थिक और शासन संबंधी सुधारों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई है। लद्दाख को "भारत का मुकुट" बताते हुए, सक्सेना ने कहा कि प्रशासन क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी, अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत और यहां के लोगों की आकांक्षाओं को संरक्षित करते हुए विकास को आगे बढ़ाना जारी रखेगा।

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