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फर्जी दस्तावेज से पासपोर्ट बनवाने के मामले में आचार्य बालकृष्ण बरी, देहरादून सीबीआई कोर्ट का फैसला

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Sep 07, 2026 05:54 pm IST,  Updated : Sep 07, 2026 06:15 pm IST

पतंजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत मिली है। देहरादून की CBI कोर्ट ने फर्जी डॉक्यूमेंट से पासपोर्ट बनवाने के मामले में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

Acharya Balkrishna- India TV Hindi
आचार्य बालकृष्ण Image Source : ANI

देहरादून: देहरादून की CBI कोर्ट ने फर्जी डॉक्यूमेंट से पासपोर्ट बनवाने के मामले में पतंजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण को बरी कर दिया। कोर्ट ने आज करीब डेढ़ दशक पुराने मामले में फैसला सुनाया। देहरादून की तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आचार्य बालकृष्ण को मामले में लगाए गए सभी आरोपों और संबंधित धाराओं से बरी कर दिया।

 
बता दें कि वर्ष 2011 में आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ शिकायत की गई थी कि वह नेपाल के नागरिक हैं। उन्होंने भारतीय पासपोर्ट फर्जी दस्तावेज के आधार पर बनाया है। यह मामला उस वक्त खासा चर्चाओं में रहा। सीबीआई ने इस मामले में वर्ष 2016 में नेपाल सरकार के साथ पत्राचार किया था। आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। इसके साथ ही शिक्षण संस्थान के पूर्व प्रिंसिपल नरेश चंद द्विवेदी के खिलाफ भी धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोपपत्र दाखिल किया गया था। 
 
टाइमलाइन

  1. 2011 में केस दर्ज: आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ अप्रैल 2011 में शिकायत मिली थी। इसके बाद CBI ने जून 2011 में प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की और जुलाई 2011 में FIR दर्ज कर ली।
  2. फर्जी डिग्री का आरोप: CBI का दावा था कि बालकृष्ण ने बरेली पासपोर्ट कार्यालय में पासपोर्ट बनवाने के लिए जो शैक्षणिक दस्तावेज लगाए थे, वे फर्जी थे।
  3. खुर्जा के कॉलेज से जुड़ा मामला: प्रस्तुत दस्तावेज बुलंदशहर (यूपी) के खुर्जा स्थित राधाकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े थे, जो सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (वाराणसी) से संबद्ध था। जांच एजेंसी ने शुरुआती दौर में इन प्रमाणपत्रों के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए थे।
  4. CBI की FIR में आपराधिक साजिश (120-B), धोखाधड़ी (420), फर्जी दस्तावेज बनाना (468, 471) और पासपोर्ट अधिनियम की धाराएं शामिल की गई थीं।
  5. जुलाई 2011 (गिरफ्तारी पर रोक): मामला गर्माने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बालकृष्ण की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई और उन्हें अपना पासपोर्ट कोर्ट में जमा कराने का आदेश दिया।
  6. जुलाई 2012 (चार्जशीट और गिरफ्तारी): जांच पूरी करने के बाद CBI ने जुलाई 2012 में विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। बालकृष्ण के अदालत में पेश नहीं होने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया। इसके बाद CBI ने 20 जुलाई 2012 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
  7. गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में सुद्धोवाला जेल, देहरादून भेजा गया। करीब एक महीने जेल में रहने के बाद अगस्त 2012 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी थी।
  8. अक्टूबर 2013 से अगस्त 2014 (आरोपों में संशोधन): अक्टूबर 2013 में अदालत ने आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ IPC की धारा 120-B, 420, 468 और 471 समेत पासपोर्ट एक्ट के तहत आरोप तय किए। इन आरोपों को बाद में चुनौती दी गई। जून 2014 में सेशन कोर्ट के आदेश के बाद अगस्त 2014 में आरोप संशोधित हुए। इसके बाद IPC की धारा 471 (forgery) और पासपोर्ट एक्ट की धारा 12(1)(B) (जानबूझकर गलत जानकारी देने या जरूरी तथ्य छिपाने) के तहत ट्रायल चला।
  9. 2018 (पासपोर्ट वापस मिला): लंबी कानूनी प्रक्रिया के बीच 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बालकृष्ण को उनका पासपोर्ट वापस करने और रीन्यू कराने की अनुमति दी थी।
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