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ONGC ने लद्दाख में पूरी की दूसरे 'जियोथर्मल' कुएं की खुदाई, जानें देश को क्या होगा फायदा

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Jul 12, 2026 10:55 am IST,  Updated : Jul 12, 2026 10:55 am IST

ONGC ने ताया कि उसकी रिसर्च और डेवलपमेंट यूनिट ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने 14,000 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित इस कुएं की लगभग 1,000 मीटर गहराई तक खुदाई करीब एक महीने में पूरी की।

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ओएनजीसी ने सफलतापूर्वक पूरी की खुदाई Image Source : ONGC

पब्लिक सेक्टर की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने लद्दाख की पुगा घाटी में दूसरे जियोथर्मल कुएं की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इसके साथ ही भारत पहले प्रायोगिक जियोथर्मल पावर प्लांट की स्थापना की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ गया है। जियोथर्मल एनर्जी पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद प्राकृतिक गर्मी का इस्तेमाल कर बिजली और थर्मल एनर्जी पैदा करती है। ये सोलर और विंड एनर्जी के उलट मौसम पर निर्भर नहीं होती और लगातार बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम है। बताते चलें कि पिछले ही महीने, पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अंडमान अपतटीय क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का दूसरा भंडार खोजा था

1 महीने में पूरी हुई 1,000 मीटर की खुदाई

ONGC ने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की जानकारी में बताया कि उसकी रिसर्च और डेवलपमेंट यूनिट ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने 14,000 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित इस कुएं की लगभग 1,000 मीटर गहराई तक खुदाई करीब एक महीने में पूरी की। ये अभियान पहले जियोथर्मल खुदाई अभियान की तुलना में कम समय और कम लागत में पूरा किया गया। ये दूसरा कुआं पुगा घाटी में पहले जियोथर्मल कुएं की सफलता पर आधारित है। पहले कुएं से पानी के उबलने के तापमान से ज्यादा गर्म भाप निकली थी, जिससे इस क्षेत्र में भू-तापीय ऊर्जा की प्रचुर संभावनाओं की पुष्टि हुई थी। 

अब अगले चरण में क्या काम करेगी कंपनी

कंपनी के अनुसार, दूसरा कुआं भारत के पहले एक मेगावाट क्षमता वाले प्रायोगिक जियोथर्मल पावर प्लांट के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। इसके सफल होने पर देश में जियोथर्मल एनर्जी के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता भी साफ हो सकता है। प्रोजेक्ट के अगले चरण में एक मेगावाट क्षमता का पायलट पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसके बाद लद्दाख के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध रहने वाली भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से क्षेत्र के जियोथर्मल रिसोर्स का लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट किया जाएगा। 

वैकल्पिक स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विकास पर सरकार का जोर

पूर्वी लद्दाख स्थित पुगा भू-तापीय क्षेत्र को भारत का सबसे संभावनाशील जियोथर्मल क्षेत्र माना जाता है। हालांकि, पुगा क्षेत्र में पिछले कई दशक से समय-समय पर खोज और परीक्षण कार्य होते रहे हैं, लेकिन तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के कारण देश में अब तक भू-तापीय ऊर्जा से व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। भारत साल 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी रणनीति के तहत सरकार सोलर, विंड और हाइड्रोपावर के साथ-साथ जियोथर्मल एनर्जी जैसे वैकल्पिक स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विकास पर भी जोर दे रही है। 

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