श्रीनगर: जम्मू एवं कश्मीर की श्रीनगर लोकसभा सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह आने वाले दिनों में लोकसभा की सदस्यता और नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता, दोनों से इस्तीफा जरूर देंगे। मेहदी ने यह फैसला पार्टी नेतृत्व से वैचारिक मतभेदों के चलते लिया है। मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं। सांसद का आरोप है कि पार्टी अपने चुनावी वादों से पीछे हट रही है। वहीं, हाल ही में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्लाह को इस्तीफा देने और नया जनादेश मांगने का चैलेंज दिया था।
चुनावी वादों से पीछे हटने का लगाया था आरोप
मेहदी ने खास तौर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2024 के घोषणापत्र का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि पार्टी ने चुनाव में अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली के लिए प्रयास करने का वादा किया था, लेकिन अब उसका पूरा ध्यान सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने पर रह गया है। मेहदी बार-बार कहते रहे हैं कि सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करना अगस्त 2019 में हटाए गए संवैधानिक संरक्षण का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर पार्टी को लगता था कि अनुच्छेद 370 बहाल नहीं किया जा सकता, तो फिर जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने 2024 के घोषणापत्र में इसकी बहाली को शामिल ही क्यों किया था।
फारूक अब्दुल्ला की चुनौती के बाद बढ़ा विवाद
मेहदी और पार्टी के बीच रिश्ते उस समय और खराब हो गए जब नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें लोकसभा सीट से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती दी। इसके बाद फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र में मेहदी ने कहा, 'निश्चिंत रहें, इस्तीफा आएगा। आपके कहने के बिना भी यह इस्तीफा आ जाता, लेकिन उससे पहले जवाबदेही तय होनी चाहिए।' यह घटनाक्रम बडगाम विधानसभा उपचुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की हार के बाद दोनों के बीच बढ़े मतभेदों की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
सिर्फ 370 ही नहीं, कई मुद्दों पर उठाए सवाल
मेहदी ने जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों, धार्मिक अधिकारों, परंपराओं, भाषा और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र शासित प्रदेश के लिए संवैधानिक गारंटी की मांग करना आखिर आपत्तिजनक क्यों हो गया है। मेहदी ने यह भी याद दिलाया कि जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने स्वायत्तता प्रस्ताव पारित किया था, उस समय फारूक अब्दुल्ला ही मुख्यमंत्री थे। फारूक अब्दुल्ला की ओर से उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर की गई टिप्पणी पर मेहदी ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह 'एक शहीद के गौरवान्वित बेटे' हैं और शहादत की लंबी परंपरा के उत्तराधिकारी हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस पर क्या पड़ेगा असर?
मेहदी के इस्तीफे का असर नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति और संसद में उसकी मौजूदगी पर पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी के लोकसभा में दो सांसद हैं, जिनमें रुहुल्लाह मेहदी भी शामिल हैं। अगर वह लोकसभा से इस्तीफा देते हैं तो पार्टी की लोकसभा में संख्या घटकर एक रह जाएगी, जब तक उनकी सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी को सफलता नहीं मिलती। हालांकि, मेहदी का फैसला सिर्फ एक सांसद के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। पार्टी की सदस्यता छोड़ने का उनका ऐलान नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर अनुच्छेद 370, 35A, राज्य का दर्जा और पार्टी के पुराने चुनावी वादों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है।
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