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बिजली दरों में बढ़ोतरी पर सियासत गर्म, फारूक अब्दुला बोले- कब तक दिल्ली के सामने हाथ फैलाते रहोगे?

 Reported By: Manzoor Mir Written By: Niraj Kumar
 Published : Aug 26, 2026 01:01 pm IST,  Updated : Aug 26, 2026 01:10 pm IST

जम्मू-कश्मीर में 1 सितंबर से बिजली की दरों में बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर केंद्र और दिल्ली पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर जम्मू-कश्मीर कब तक दिल्ली के सामने हाथ फैलाता रहेगा।

फारूक अब्दुल्ला- India TV Hindi
फारूक अब्दुल्ला Image Source : PTI

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में बिजली के बिल अब राजनीतिक चिंता की नई वजह बन गए हैं। 1 सितंबर से बिजली की दरों में 6.83% की बढ़ोतरी होने जा रही है। बिजली की दरों में बढ़ोतरी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार के लिए एक नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी पार्टियां इस फैसले की आलोचना कर रही हैं; बीजेपी ने तो दरों में बढ़ोतरी के विरोध में 2 सितंबर को सिविल सचिवालय का घेराव करने की योजना भी बनाई है। पीडीपी और अपनी पार्टी जैसे दल उमर सरकार के फैसले के खिलाफ पहले ही सड़कों पर उतर चुके हैं।

आप कब तक गुलाम बने रहेंगे?

जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से पूछा गया कि क्या जम्मू-कश्मीर सरकार हाल ही में मंजूर की गई बिजली दरों में बढ़ोतरी की समीक्षा करेगी, तो उन्होंने जवाब में पूछा, "आप (जम्मू-कश्मीर) कब तक दिल्ली के सामने हाथ फैलाते रहेंगे?" उन्होंने तर्क दिया कि यह क्षेत्र वित्तीय मदद के लिए नई दिल्ली पर निर्भर रहते हुए ज़्यादा राजनीतिक स्वायत्तता की मांग नहीं कर सकता। "मुझे यह बताइए: आप कब तक गुलाम बने रहेंगे? कभी न कभी तो आपको अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। आप कब खड़े होंगे?"

बिजली की दरों में बढ़ोतरी के तात्कालिक मुद्दे से आगे बढ़कर, अब्दुल्ला ने केंद्र पर जम्मू-कश्मीर की आर्थिक निर्भरता को अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग से जोड़ा। उन्होंने कहा "आप अनुच्छेद 370 चाहते हैं, फिर भी आप हाथ फैलाते हैं। ये दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकतीं।"

उपभोक्ताओं पर सीमित बोझ:उमर

वही सीएम उमर अब्दुल्ला ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब ये पार्टियां सत्ता में थीं, तो उन्होंने दरों में 13.5% से 14% तक की बढ़ोतरी की थी, जबकि उनकी सरकार ने दरों में बदलाव के ज़रिए उपभोक्ताओं पर केवल सीमित बोझ डाला है। उमर ने जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार अगले 3 वर्षों तक दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करेगी।

जम्मू-कश्मीर में 1 सितंबर से बिजली की दरों में 6.83% की बढ़ोतरी होने जा रही है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है जब नेशनल कॉन्फ्रेंस को अनुच्छेद 370 और राज्य के दर्जे को लेकर पहले ही आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। खासकर, 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने के चुनावी वादे को देखते हुए, इस मुद्दे ने सरकार को घेरने का विपक्ष को एक बड़ा मौका दिया है। इससे पहले मंगलवार को फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी से कहा था कि अगर उन्हें लगता है कि उनकी चुनावी जीत उनके निजी समर्थन पर आधारित थी, तो उन्हें लोकसभा से इस्तीफा दे देना चाहिए और जनता से नया जनादेश मांगना चाहिए। 

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