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श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में कड़ी सुरक्षा के बीच हुई छड़ी मुबारक की पूजा, जानें इसका महत्व

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में कड़ी सुरक्षा के बीच छड़ी मुबारक की पूजा संपन्न हो गई है। आइए जानते हैं कि क्या है इस पूजा का विशेष महत्व।

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Image Source : REPORTER श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में छड़ी मुबारक की पूजा।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आज गुरुवार को सुरक्षा के सख्त इंतजामों के बीच शंकराचार्य मंदिर में छड़ी मुबारक की पूजा की गई। महंत दीपेंद्र गिरि और देश के विभिन्न राज्यों से आए साधु-महंतों ने इस पूजा में भाग लिया। छड़ी मुबारक 4 अगस्त को श्रीनगर से पहलगाम के लिए रवाना होगी। इस वर्ष छड़ी मुबारक की अंतिम पूजा 9 और 10 अगस्त को अमरनाथ गुफा में की जाएगी।

शंकराचार्य मंदिर में पूजा

श्रीनगर स्थित दशनामी अखाड़े के शिव मंदिर में आज पवित्र अमरनाथ गुफा जाने वाली छड़ी मुबारक की हर-हर महादेव बम-बम भोले के जयकारों के साथ पूजा की गई। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, हर वर्ष की तरह आज भी छड़ी मुबारक को अमरनाथ गुफा ले जाने से पहले आज शंकराचार्य मंदिर में पूजा की गई। इस अवसर पर महंतों और साधुओं के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी शामिल हुए। परंपरा के अनुसार कल शारिका देवी मंदिर में पूजा की जाएगी, जिसके बाद छड़ी मुबारक को पहलगाम के रास्ते अमरनाथ गुफा तक ले जाया जाएगा।

क्या है इस पूजा का महत्व?

छड़ी मुबारक का महत्व काफी विशेष है। मान्यता है कि अमरनाथ यात्रा पारंपरिक रूप से छड़ी मुबारक की प्रथम पूजा के साथ शुरू होती है। छड़ी मुबारक को कश्मीर के विभिन्न मंदिरों में ले जाया जाता है, जहां इसकी पूजा की जाती है। अमरनाथ यात्रा की अंतिम पूजा पूरी होने के बाद, पहलगाम में लिद्दर नदी के तट पर अंतिम पूजा की जाती है, जिसके साथ यात्रा पूरी होती है।

परंपरा के अनुसार, छड़ी मुबारक की सबसे बड़ी पूजा 4 अगस्त को की जाएगी। उस दिन छड़ी मुबारक को दशनामी अखाड़े से कश्मीर के विभिन्न मंदिरों से होते हुए पहलगाम और फिर अमरनाथ गुफा तक ले जाया जाएगा, जहां अंतिम पूजा के साथ इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा संपन्न होगी। इसके बाद, छड़ी मुबारक को वापस दशनामी अखाड़े में लाया जाता है, जहां छड़ी मुबारक को अगले वर्ष तक बंद किया जाता है।

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