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Amarnath Yatra: बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, 20वें जत्थे में 4388 तीर्थयात्री रवाना

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jul 20, 2025 01:38 pm IST,  Updated : Jul 20, 2025 01:40 pm IST

Amarnath Yatra: अमरनाथ गुफा मंदिर में बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए भगवती नगर आधार शिविर से 900 महिलाओं सहित 4,388 तीर्थयात्रियों का 20वां जत्था रविवार को रवाना हुआ।

अमरनाथ यात्रा- India TV Hindi
अमरनाथ यात्रा Image Source : FILE PHOTO

Amarnath Yatra: दक्षिण कश्मीर हिमालय में 3,880 मीटर ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए चल रही वार्षिक तीर्थयात्रा अपने चरम पर है। रविवार को भगवती नगर आधार शिविर से 900 महिलाओं सहित कुल 4,388 तीर्थयात्रियों का 20वां जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने बताया कि इस यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब तक 2.90 लाख से अधिक तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।

यह 38-दिवसीय वार्षिक यात्रा 3 जुलाई को अनंतनाग में नुनवान-पहलगाम और गांदरबल में बालटाल मार्गों से शुरू हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, दोनों ही मार्गों पर यात्रा सुचारू रूप से जारी है और उम्मीद है कि रविवार दिन में तीर्थयात्रियों की कुल संख्या तीन लाख का आंकड़ा पार कर जाएगी।

पहलगाम और बालटाल के लिए रवाना

आज रवाना हुए जत्थे में 130 साधु और साध्वियां भी शामिल थे। तीर्थयात्रियों का यह समूह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अलग-अलग काफिलों में पहलगाम और बालटाल के लिए रवाना हुआ। जानकारी के अनुसार, 115 वाहनों के काफिले में 2,815 तीर्थयात्री पहलगाम मार्ग से गए, जबकि 95 वाहनों में सवार 1,573 तीर्थयात्रियों ने बालटाल मार्ग को प्राथमिकता दी।

अमरनाथ यात्रा का महत्व

बता दें कि अमरनाथ यात्रा हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित है। अमरनाथ को 'तीर्थों का तीर्थ' कहा जाता है, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने इसी गुफा में देवी पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। माना जाता है कि बाबा अमरनाथ के हिम शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति को शिव का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त होता है और यह काशी में दर्शन का दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना अधिक पुण्य प्रदान करता है।

अमरनाथ यात्रा 2025 इस बार 3 जुलाई से शुरू हुई थी, जो 9 अगस्त तक चलेगी। यह यात्रा लगभग 40-45 दिनों तक चलती है, जो श्रावण पूर्णिमा (रक्षा बंधन) के दिन समाप्त होती है। (भाषा इनपुट के साथ)

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