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करीब 2 दशकों बाद कोलकाता लौट रहीं तस्लीमा नसरीन, BJP ने किया स्वागत तो विपक्ष ने घेरा

 Written By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jul 15, 2026 02:00 pm IST,  Updated : Jul 15, 2026 02:07 pm IST

तस्लीमा नसरीन लगभग दो दशकों के बाद कोलकाता लौट रही हैं। इसे लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

Taslima Nasrin- India TV Hindi
तस्लीमा नसरीन Image Source : PTI

बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन लगभग दो दशकों के बाद कोलकाता लौटने वाली हैं। 2007 में उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक 'द्विखंडितो' में ईशनिंदा के आरोपों को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें शहर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। उस समय की तत्कालीन वामपंथी सरकार ने उनकी इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2004 से 2007 तक कोलकाता में रहने वाली 63 वर्षीय लेखिका तस्लीमा नसरीन वर्तमान में दीर्घकालिक निवास परमिट पर दिल्ली में रह रही हैं।

1 अगस्त को कोलकाता के रवींद्र सदन में कार्यक्रम

अब साल 2026 में, तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त को कोलकाता के रवींद्र सदन में कट्टरपंथ के खिलाफ आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रही हैं। तीन अलग-अलग संगठनों के सामूहिक निमंत्रण पर 2007 के बाद यह उनकी पहली कोलकाता यात्रा होगी। आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम में उनके सम्मान में एक नागरिक अभिनंदन समारोह रखा गया है, जिसके बाद वे अपनी कविताएं सुनाएंगी और एक परिचर्चा में हिस्सा लेंगी।

इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता और प्रसिद्ध लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के भी शामिल होने की उम्मीद है। तस्लीमा नसरीन की इस आगामी यात्रा को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

बीजेपी का रुख

राज्य बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने तस्लीमा नसरीन की वापसी का जोरदार स्वागत करते हुए कहा, "मैंने राज्य सरकार से तस्लीमा नसरीन को बंगाल लाने के लिए कहा था। उनकी आवाज को क्यों दबाया जाना चाहिए? उन्होंने बांग्लादेश में एक हिंदू परिवार पर हुए अत्याचारों पर 'लज्जा' उपन्यास लिखा था, लेकिन पिछली वामपंथी सरकार ने उनके काम पर प्रतिबंध लगा दिया। हम कोलकाता में उनके आगमन का स्वागत करते हैं।"

वहीं, बंगाल सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी इस पर खुशी जताते हुए कहा,  "पिछली सरकार के कार्यकाल में उन्हें कभी लौटने का मौका नहीं दिया गया। विपक्ष धर्मनिरपेक्षता की बड़ी-बड़ी बातें करता है, लेकिन जब उन्होंने अपनी किताब में सच लिखा, तो उन्हें सुरक्षा देने से मना कर दिया गया। तृणमूल सरकार के दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों को केवल राजनीतिक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया। आज मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार के तहत तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त को आ रही हैं, यह हमारे लिए गर्व और खुशी की बात है।"

TMC की प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ, तृणमूल विधायक अखरुज्जमां ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे ध्रुवीकरण की राजनीति बताया। उन्होंने कहा,  "तस्लीमा नसरीन बांग्लादेश की लेखिका हैं। उन्होंने मुस्लिम समुदाय और इस्लाम में शरिया के खिलाफ काफी कुछ कहा है। अगर कोई मुसलमानों के खिलाफ बोलता है, तो डबल-इंजन सरकार उसका सम्मान करेगी ही, इसमें कहने के लिए और बचा ही क्या है?"

ISF का आरोप

इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने इस दौरे को बीजेपी की विफलताओं से ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया। सिद्दीकी ने दावा किया, "बीजेपी अन्नपूर्णा योजना, सस्ती बिजली और महिला सुरक्षा के वादों के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन वे इन सभी मोर्चों पर पूरी तरह विफल रहे हैं। अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए वे तस्लीमा नसरीन को ला रहे हैं, ताकि वह मुस्लिमों के खिलाफ कुछ भड़काऊ बयान दें और वे इसका फायदा उठा सकें।"

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