जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के करीब 18 से 20 विधायकों ने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को हटाने की मांग करते हुए एक ज्ञापन तैयार किया है। सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ विधायकों ने यह ज्ञापन पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को सौंपा है।
असंतुष्ट विधायकों का कहना है कि पार्टी को दोबारा मजबूत करने और संगठन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़े बदलाव जरूरी हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह किसी तरह की बगावत नहीं है। विधायकों का कहना है, "हम पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं, लेकिन बागी नहीं हैं। हमारा मकसद पार्टी को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे मजबूत बनाना है।"
पुराने मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका देने की मांग
सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने मंत्रिमंडल में बदलाव की मांग रखी है। उनकी मांग है कि डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी समेत सभी पुराने मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को सरकार में मौका दिया जाए।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी को तत्काल पद से हटाने की मांग भी उठाई गई है। विधायकों का तर्क है कि चुनाव हारने के बावजूद उन्हें कैबिनेट मंत्री के समान दर्जा और सुविधाएं मिल रही हैं।
घोषणापत्र लागू करने और अनुच्छेद 370-35A की बहाली पर जोर
असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी के चुनावी घोषणापत्र को पूरी तरह लागू करने की मांग भी की है। खास तौर पर अनुच्छेद 370 और 35A को बहाल करने की पुरजोर कोशिश करने की विशेष मांग शामिल है।
विधायकों का कहना है कि पार्टी और सरकार को कुछ चुनिंदा लोगों की निजी जागीर नहीं बनने दिया जा सकता। संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामूहिक नेतृत्व की व्यवस्था होनी चाहिए।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी
नेशनल कॉन्फ्रेंस में यह असंतोष मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के बाद बढ़ा। इस प्रक्रिया से मुबारक गुल, लारमी और नजीर गुरेजी जैसे नेताओं की नाराजगी सामने आई।
बताया जाता है कि नाराजगी दूर करने के प्रयास में फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया था। हालांकि, श्रीनगर में असंतुष्ट विधायकों की बैठक के बाद महज दो दिनों के भीतर ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को और उजागर कर दिया।
आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा भी झटका
पार्टी की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं, जब श्रीनगर के सांसद और प्रभावशाली शिया धर्मगुरु आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को सांसद पद के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफे का ऐलान किया। बताया जा रहा है कि अब्दुल्ला परिवार और रुहुल्लाह मेहदी के बीच पिछले करीब एक साल से टकराव की स्थिति बनी हुई थी।
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