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धनबाद में पत्थर से कुचलकर हत्या के मामले बढ़े, 4 महीनों में 6 हत्याओं में पत्थर बना हथियार

पुलिस का कहना है कि पत्थर आसानी से मिल जाते हैं और हत्या में इस्तेमाल करने के बाद उन्हें ठिकाने लगाना भी आसान होता है। इसी वजह से अपराधी हत्या करने के लिए इसका ज्यादा उपयोग कर रहे हैं, लेकिन पुलिस उन तक पहुंच रही है।

Murder Accused- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT पुलिस की गिरफ्त में हत्या के आरोपी

झारखंड के धनबाद जिले में हाल के महीनों में पत्थर और साधारण घरेलू-सामान का इस्तेमाल कर बेरहमी से हत्याओं की एक खौफनाक लकीर उभरकर सामने आई है। 22-23 जुलाई की रात सोरीटांड़ इलाके में पत्थर से कुचलकर एक 57 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान बीसीसीएल कर्मी जयराम मांझी के रूप में हुई है। हालांकि, पुलिस ने 24 घंटे के अंदर हत्या के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि धनबाद में पत्थर और अन्य घरेलू सामान का इस्तेमाल कर हत्या करने के मामले बढ़े हैं। घटनास्थल पर मिले खून से सने पत्थर और लोहे के पाइप ने एक बार फिर दिखा दिया कि अपराधी अक्सर चेहरे को कुचलकर पहचान मिटाने की नीयत से ऐसा क्रूर तरीका अपनाते हैं। 

हत्या कर झाड़ियों में फेंका शव

पुलिस के अनुसार हत्या के बाद शव झाड़ियों में फेंका गया था, जबकि मृतक की कार घटनास्थल से लगभग 30 गज दूर खड़ी मिली। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने घटनास्थल, टेक्निकल साक्ष्यों और छापेमारी के आधार पर आरोपियों की निशानदेही पर लोहे का पाइप, खून लगा पत्थर, मृतक का मोबाइल, सिम व एटीएम कार्ड, मोटरसाइकिल और आरोपियों के खून सने कपड़े बरामद किए हैं। सभी साक्ष्य फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

आरोपी को ऑनलाइन गेमिंग की लत

मामले की गंभीरता इस बात से भी जाहिर होती है कि आरोपी कुंदन ऑनलाइन गेमिंग की लत और बढ़ती आर्थिक जरूरतों के चलते लालच में आया था। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि कुंदन ने सोचा कि जयराम के पास पर्याप्त धन होगा, इसलिए प्रेम के साथ मिलकर उसे खत्म कर के खाते से पैसे निकालने की साजिश रची। हत्या के बाद वे सफल नहीं हो पाए। ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने टीम की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी अनुशंधान की तारीफ की है।

सभी 6 हत्याओं मे पत्थर बना मुख्य हथियार

यह अकेला मामला नहीं है। पिछले तीन महीनों में धनबाद में कम से कम छह हत्याओं में पत्थर से चेहरा कुचल कर पहचान मिटाने की प्रवृत्ति सामने आई है। कुछ प्रमुख घटनाओं का क्रम इस प्रकार है।
चांदमारी ग्राउंड के पीछे झाड़ियों में मिला शव (11 मई): डेटाबद्ध मामले में जितेश नामक युवक का शव बरामद हुआ था, जिसमें हिंसा के निशान और पहचान मिटाने की कोशिश दिखाई दी।
बेरोजगार बेटे द्वारा पिता की हत्या (24 जुलाई): सरकारी नौकरी पाने की लालच में बेटे ने अपने ही पिता को पत्थर से कुचलकर मारवाया — यह मामला पारिवारिक खून-खराबे और आर्थिक सन्दिग्धियों का कड़वा उदाहरण है।
टुंडी जंगल में जीजा ने साले की निर्मम हत्या: आरोपी चंदन कुमार भोक्ता ने पहले गला दबाया और बाद में चेहरे को पत्थर से कुचल कर पहचान मिटाने की कोशिश की।

पहचान मिटाने के लिए पत्थर का इस्तेमाल

अपराधी पत्थर जैसे सस्ते और आसानी से मिलने वाले औजारों का प्रयोग करते हैं, ताकि शोर-शराबे के बीच पहचान मिट जाए और साक्ष्य सीमित रहे। इसके बावजूद पुलिस छानबीन में अक्सर छोटी-छोटी चूकें, फोन-डेटा, सीसीटीवी फुटेज और अपराधियों की निशानदेही उन्हें पकड़ने में निर्णायक साबित होती हैं। स्थानीय लोगों में डर और असहजता बढ़ रही है। समाज में आर्थिक विषमता, युवाओं में ऑनलाइन गेमिंग और कर्ज की प्रवृत्ति, और पारिवारिक तनाव ऐसे ज्वलनशील तत्व बन रहे हैं, जो हिंसा की आग को भड़काते हैं। पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि सामुदायिक सतर्कता, सूचना साझा करना और तेजी से तकनीकी-अनुसंधान अपराधों को रोकने में बहुत सहायक हैं।

मामले की जांच कर रही पुलिस

तत्काल कदमों में एसआईटी फोरेंसिक रिपोर्ट से पुष्टि कर रही है कि बरामद खून सने कपड़ों और हथियारों का सीधा संबंध आरोपियों से है या नहीं। आगे की जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या कहीं और से किसी तीसरे पक्ष ने साजिश रची थी या नहीं। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया जारी है। जिला और पुलिस प्रशासन को अब ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए जन-सहयोग, गांव-स्तर पर पहरेदारी और मानसिक स्वास्थ्य/आर्थिक सहायता अभियानों पर काम तेज करने की सख्त जरूरत नजर आती है। 

(धनबाद से कुंदन सिंह की रिपोर्ट)

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