झारखंड के धनबाद में सांसद और मेयर के बीच छिड़ी भाजपा की आंतरिक 'पावर गेम' अब रेलवे तक पहुंची और इसका असर पड़ोसी पश्चिम बंगाल पर पड़ सकता है। दरअसल, मुंबई ट्रेन उद्घाटन पर मेयर संजीव सिंह और झरिया विधायक रागिनी सिंह को न्योता देकर 3 घंटे पहले 'कैंसल' कर बैनर तक बदलने से विवाद भड़का। धनबाद बंगाल से सटा होने से यह खबर भाजपा के लिए 'आग में घी' साबित हो रही है और विपक्ष को 2026 बंगाल चुनावों में बड़ा मुद्दा मिल गया है।
'किसके इशारे पर जिले के प्रथम नागरिक को रोका?'
ट्रेन उद्घाटन के तीन दिन पहले निमंत्रण से शुरू हुआ ड्रामा आखिरी पल में पलट गया। रेलवे ने मेयर संजीव सिंह और विधायक रागिनी सिंह को बुलाया, लेकिन उद्घाटन से 3 घंटे पहले पत्र देकर रोक दिया। इसके बाद स्टेशन बैनर से नाम भी हटा दिए गए। मेयर इसे 'सांसद की साजिश' बता रेलवे से जवाब मांग रहे कि "किसके इशारे पर जिले के प्रथम नागरिक को रोका?"
बंगाल चुनाव से पहले विपक्ष को मिला 'मुद्दा'
रेलवे का दावा- सिर्फ सांसद-विधायक को प्राथमिकता का निर्देश। लेकिन सवाल बाकी– नाम पहले क्यों जोड़े? इस पर पश्चिम बंगाल में TMC और विपक्ष नेता चुटकी ले रहे हैं कि– "BJP की एकता का नमूना!" क्या यह 2026 बंगाल विधानसभा चुनावों में BJP को महंगा पड़ेगा?
वहीं, लोग चर्चा कर रहे हैं कि चुनाव से पहले किसका ब्लड प्रेशर ज्यादा था और अब कार्यक्रम से नाम हटाए जाने के बाद फिर किसका बढ़ रहा है? रेलवे भी इस विवाद में फंसा नजर आ रहा है, जबकि भाजपा की छवि पर इस विवाद का असर पड़ सकता है। धनबाद बंगाल से सटा होने के कारण यहां की राजनीति का धुआं बंगाल चुनावों तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।
(रिपोर्ट- कुंदन सिंह)
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