Jharkhand Snake Bite Cases: झारखंड में सांप का डंसना अब बड़ी समस्या बन गया है। सर्प दंश यहां तेजी से बढ़ता स्वास्थ्य संकट दिख रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2022 से अब तक झारखंड में सर्पदंश के 9 हजार से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। 2030 तक इन घटनाओं को कम करने को लेकर प्रयास भी चल रहे हैं, लेकिन पिछले 4 साल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
पिछले 4 साल में 9 हजार से ज्यादा केस आए सामने
बता दें कि झारखंड में साल 2022 से अब तक सर्प दंश के 9 हजार 438 केस सामने आए हैं। पिछले कुछ साल में ऐसी घटनाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण से झारखंड के हेल्थ डिपार्टमेंट ने डॉक्टर्स से ऐसे मामलों से निपटने को लेकर आधिकारिक दिशा-निर्देशों के पालन करने के लिए कहा है।
2025 में अचानक बढ़े सांप काटने के मामले
झारखंड के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में झांरखंड में सांप के काटने के 392 केस दर्ज किए गए, जो 2023 में बढ़कर 1 हजार 647 हो गए, जिनमें 15 लोगों की मौतें हो गई। साथ ही, 2024 में 2 हजार 760 घटनाएं हुईं जिनमें 22 मौतें हुईं। इसके बाद, 2025 में 4 हजार 78 केस सामने आए जिनमें 26 मौतें हुईं। अब अप्रैल, 2026 तक झारखंड में सांप के काटने के 561 केस दर्ज किए गए हैं।
सख्ती से लागू हो राष्ट्रीय सर्पदंश प्रबंधन प्रोटोकॉल
झारखंड के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अभियान के Director शशि प्रकाश झा के मुताबिक, सभी सिविल सर्जनों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से निर्धारित राष्ट्रीय सर्पदंश प्रबंधन प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया। उन्होंने आगे कहा, 'सांप के काटने के मामलों और इसकी वजह से होने वाली मौतों को सरकार ने एक अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया है।'
सांप के काटने से होने वाली मौतों को कम करना है लक्ष्य
शशि प्रकाश झा ने कहा कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की तरफ से शुरू की गई राष्ट्रीय कार्य योजना का मकसद, 2030 तक सांप के काटने से होने वाली मौतों और विकलांगताओं को 50 फीसदी तक कम करना है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने सभी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स, सब-डिवीजन हॉस्पिटल्स, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों को Snake Venom Resistant Serum की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
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