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अनाज को इस भयानक बीमारी से बचाना है तो इस तरह से करें भंडारण

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए गुरुवार को कृषि वैज्ञानिकों ने अनाज भंडारण का बुलेटिन जारी किया। बुलेटिन में वैज्ञानिकों ने कहा है कि अनाज को भंडार करने से पहले अच्छी तरह से सुखा लें।

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए गुरुवार को कृषि वैज्ञानिकों ने अनाज भंडारण का बुलेटिन जारी किया। बुलेटिन में वैज्ञानिकों ने कहा है कि अनाज को भंडार करने से पहले अच्छी तरह से सुखा लें। साथ ही भंडारगृह में नए अनाज को पुराने अनाज के साथ न रखें। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि भंडारगृह में रखे अनाजों को कीड़ों और चूहों से बचाने के लिए नियमित साफ-सफाई होनी चाहिए।

समय-समय पर अनाज की जांच करते रहना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों ने रबी मौसम में चने की खेती करने वाले किसानों को सलाह देते हुए कहा कि चने की फसल में बुआई के 35-40 दिन बाद खुटाई अवश्य करनी चाहिए। चने के जिन खेतों में उकठा और कॉलर रॉट नामक बीमारी का प्रकोप हर साल होता है, वहां चने के स्थान पर अन्य फसल लेनी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि सरसों और कुसुम के अतिरिक्त पौधों को उखाड़कर पौधों की दूरी 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। अरहर की फसल में फलभेदक कीड़ों के नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब 300 ग्राम पांच लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

कृषि बुलेटिन में साक-सब्जी बोने वाले किसानों के लिए भी उपयोगी सलाह दी है। पिछले माह रोपण की गई सब्जियों में गुड़ाई कर नत्रजन उर्वरक देना चाहिए। प्याज के तैयार पौधों को रोपण करने के लिए शीर्ष के एक तिहाई पत्तियों को काट देना चाहिए। 

कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि कद्दूवर्गीय सब्जियों की अगेती खेती के लिए पॉलीथीन में पौधे तैयार करना फायदामंद होता है। बैगन एवं टमाटर की फसल में जीवाणु जनित उकठा रोग के निदान के लिए मरे हुए पौधों को उखाड़कर जला देना चाहिए। इसके बाद एक सप्ताह तक फसल में सिंचाई नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि टपक सिंचाई वाली फसलों में उकठा रोग का प्रकोप कम होता है।

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