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आसनसोल: खास अंदाज में मां दुर्गा की विदाई, महिलाएं, बच्चे और बूढ़े सभी मिलकर बंदूकों से देते हैं सलामी

दुर्गा पूजा की धूम पूरे बंगाल और नॉर्थ भारत में छाई हुई है वहीं आसनसोल में एक खास अंदाज में वहां के महिलाएं, बच्चे, बूढ़े खास अंदाज में इस पूजा को मनाते हैं।

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नई दिल्ली: दुर्गा पूजा की धूम पूरे बंगाल और नॉर्थ भारत में छाई हुई है वहीं आसनसोल में एक खास अंदाज में वहां की महिलाएं, बच्चे, बूढ़े इस पूजा को मनाते हैं। अब आप सोचेंगे ऐसा क्या खास है तो आपको बता दें कि सच में काफी अनोखा अंदाजा है अासनसोल के लोगों का दुर्गा पूजा मनाने का। आसनसोल के बच्चे, महिलाएं और बूढ़े सभी मिलकर मां की विदाई के वक्त बंदूकों से सलामी देते हैं। यह परंपरा काफी सालों से चली आ रही है, इस परंपरा में दर्जनों की संख्या में बंदूकों से सरेआम गोलियां चलाई जाती है, सिर्फ इतना ही नहीं इसमें बच्चे, महिलाएं और बूढ़े सभी मिलकर बंदूकों से मां दुर्गा को सलामी देते हैं।

आपको बता दें कि नौ दिनों तक चले नवरात्र और दुर्गा पूजा के बाद मां के विदाई के वक्त यह परंपरा निभाई जाती है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पश्चिम बंगाल में जहां एक से बढ़कर एक पूजा पंडाल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं वहीं पश्चिम बंगाल के कई पुराने घराने और जमींदार परिवार द्वारा इस परंपरागत तरीके से दुर्गा पूजा मनाया जाता है। 

नौ दिनों तक चले पूजा के बाद दशमी के दिन यानि मां दुर्गा की विदाई और प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान यह परंपरा निभाई जाती है। दशमी के दिन पूरे बंगाल में मूर्ति विसर्जन का की जाती है लेकिन इन सबके बीच पश्चिम बंगाल के आसनसोल शहर स्थित कुल्टी के बेलरुई जमींदार परिवार के दुर्गा पूजा विसर्जन में एक अनोखा और चौंकाने वाली घटना सामने आई है ।

यहां परिवार के दर्जनों सदस्यों द्वारा एक साथ बंदूकों से मां दुर्गा को सलामी देते हुए और उन्हें खास अंदाज में विदाई देते देख सकते हैं। कुल्टी के कई जमींदार परिवार द्वारा शुक्रवार इसी खास अंदाज में मां दुर्गा को विदाई दी गई। इस दौरान यहां की जो तस्वीरें सामने आई हैं वह वाकई चौंकाने वाली हैं। परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ-साथ परिवार की महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी हाथों में बंदूक थाम कर फायरिंग करते हैं। 

महिलाओं से लेकर छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा हाथों में बंदूक थामकर फायरिंग की जाती है। इस घटना को परिवार वाले न केवल अपनी आस्था बल्कि परंपरा बताते हुए काफी गौरव महसूस करते हैं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि यह करीब 200 सालों से उनके परिवार की परंपरा का हिस्सा है और परिवार में आने वाले नए सदस्य भी इसी तरह से इस परंपरा का हिस्सा बनते हैं। यही नहीं परिवार से जुड़ने वाले सभी सदस्य अलग-अलग शहरों में रहने के बावजूद दशमी के दिन आवश्यक तौर पर इस पूजा में शामिल होते हैं और फायरिंग कर मां दुर्गा को सलामी देते हैं।

 

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