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नवरात्र स्पेशल: ऐसे करें मां दुर्गा के दूसरें स्वरुप माता ब्रह्मचारिणी की पूजा

ब्रह्मचारिणी भक्तों एवं सिद्धों को फल देने वाली माता हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है।

Goddess Brahamcharini- India TV Hindi
Goddess Brahamcharini

धर्म डेस्क: नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। मां दुर्गा ने पार्वती के रूप में पर्वतराज के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और नारद के कहने पर पार्वती ने शिव को पति मानकर अनको पाने के लिए कठोर तपस्या की। हजारों सालों तक तपस्या करने के बाद इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। नवरात्र के दूसरें दिन को इसी तप को प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।

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ब्रह्मचारिणी भक्तों एवं सिद्धों को फल देने वाली माता हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है।

इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करके आप अपने जीवन में धन-समृद्धि, खुशहाली ला सकतेहै। जानिए  मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप की पूजा कैसे करनी चाहिए।

ऐसे करें पूजा-
हिंदू धर्म के अनुसार सबसे पहले जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को आपने कलश में आमंत्रित किया है। उन्हें दूध, दही, घृत और शहद से स्नान कराएं। इसके बाद इन पर फूल, अक्षत, रोली, चंदन और भोग लगाएं। इसके बाद आचमन करें फिर पान, सुपारी  और कुछ दक्षिणा रखकर चढ़ाएं। इसके बाद अपने हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें।

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू, देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा

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