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पंडाओं पर कोड़े बरसाती हैं गोपिकाएं, दाऊजी के हुरंगा में ऐसा होता है नजारा, बल्देव में जमकर खेली जाती है होली

Baldev Dauji Huranga Date 2026: होली के अगले दिन दाऊजी का हुरंगा होता है। मथुरा से 22 किलोमीटर दूर बल्देव में दाऊ भगवान के मंदिर में इसका आयोजन होता है। देश-विदेश से सैलानी हुरंगा देखने पहुंचते हैं।

दाऊजी का हुरंगा 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV दाऊजी का हुरंगा 2026

Baldev Holi 2026: मथुरा वृंदावन की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। देश विदेश से बड़ी संख्या में लोग नंदगांव और बरसाने की होली देखने पहुंचते हैं। होली से कई दिनों पहले ही बृज में कृष्ण भक्तों को जमघट लग जाता है। अगर आप इस बार मथुरा की होली देखने जा रहे हैं तो बरसाने की होली के अलावा आपको एक बार दाऊजी का हुरंगा भी जरूर देखना चाहिए। मथुरा से सिर्फ 22 किलोमीटर की दूरी पर बल्देव टाउन है, जहां भगवान बलभद्र यानि दाऊजी महाराज का भव्य मंदिर है। इस मंदिर में होली से अगले दिन हुरंगा का आयोजन होता है। 

दाऊजी का हुरंगा कब होता है?

इस बार दाऊजी का हुरंगा 5 मार्च को होगा। दाऊजी में गजब की होली खेली जाती है। दाऊजी के पंडा और उनकी पत्नियां हुरंगा में हिस्सा लेती हैं। हुरियारिनें यहां गोपिकाओं के जैसे परिधान पहनकर होली खेलने वाले पुरुषों पर जमकर कोड़े बरसाती हैं। दाऊजी की कोड़े मार होली देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु उमड़ने लगते हैं।  

बल्देव मंदिर में होता है होली का भव्य कार्यक्रम

दाऊजी के हुरंगा में भगवान शेषावतार श्री दाऊजी महाराज के लिए होता है। दाऊजी के हुरंगा की परंपरा है, जिसमें पुरुष गोप समूह में आते हैं और महिलाएं गोपिका के रूप में सज-संवरकर मंदिर पहुंचती हैं। जब गोप अपनी गोपिकाओं को छेड़ते हैं तो गोपिका बनी महिलाएं उनपर जमकर कोड़े बरसाती हैं। भीगे बदन पर कोड़े की मार भी प्यार के सामने कम लगने लगती है। सभी प्रेम के रंगों से भीगते हुए जमकर होली खेलते हैं। होली का ये रंग श्रद्धालु को खूब आनंदित करता है।

आसमान में उड़ता है गुलाल

दाऊजी में महीनों पहले से हुरंगा की तैयारियां शरू हो जाती हैं। होली खेलने के गीत और बोलियों की प्रैक्टिस शुरू हो जाती है। रंग अबीर और गुलाल उड़ाने के लिए बड़ी बड़ी मशीनों मंगाई जाती हैं। बैंड बाजा और ढोल बजने लगते हैं। मंदिर परिसर को खाली कर लिया जाता है। दाऊजी के हुरंगा में खास टेसू के फूलों से बने रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। मंदिर में ऊपर दर्शकों के बैठने की जगह होती है। होली खेलते हुए भक्तों पर गुलाल और फूलों की पत्तियां उड़ाई जाती हैं। हुरंगा वाले दिन सुबह 4 बजे से ही दाऊजी महाराज मंदिर के दर्शन खुल जाते हैं। सुबह से ही भक्तों का पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। दाऊजी का हुरंगा सुबह 9 बजे से शुरू हो जाता है जो दोपहर तक चलता है।

 

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