दीपावली का त्योहार जहां खुशियां लेकर आता है, वहीं मध्य प्रदेश में कई घरों में सन्नाटा पसरा है। इसका कारण सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अवैध "आंख फोड़वा गन" है। इस घातक हथियार के कारण मध्य प्रदेश में लगभग 300 से ज्यादा और अकेले भोपाल के अस्पतालों में 150 से अधिक आंख खराब होने के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें रोशनी जाने का गंभीर खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद, यह गन खुलेआम बिक रही थी। इंडिया टीवी पर ये खबर चलने के बाद जिला प्रशासन ने इस अवैध आंख फोड़वा गन को प्रतिबंधित करने का आदेश जारी कर दिया है।
हाहाकार मचाने वाली देसी गन
यह गन मात्र 50 रुपये के PVC पाइप, 10 रुपये के कैल्शियम कार्बाइड, पानी की कुछ बूंदों और गैस लाइटर के इस्तेमाल से बनती है। इस देसी हथियार ने मध्य प्रदेश के 300 से ज्यादा बच्चों और युवकों की आंखों की रोशनी खतरे में डाल दी है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 18 अक्टूबर से अब तक 42 मामले दर्ज हो चुके हैं।
दर्दनाक मामले
- अलजैन (7 साल): यूट्यूब पर देखकर पिता द्वारा 250 रुपये में लाई गई गन चलाते समय धमाका हुआ और उसकी बाईं आंख पूरी तरह जल गई।
- करन पंथी (14 साल): 150 रुपये में खरीदी यह गन चलाते समय कार्बाइड का टुकड़ा आंखों में चला गया। डॉक्टर अब उसकी रोशनी बचाने के लिए गर्भनाल की झिल्ली (एमनियोटिक मेम्ब्रेन) का प्रयोग कर रहे हैं।
- प्रशांत मालवीय (26 साल): 150 रुपये की यह बंदूक चलाने के दौरान हुए धमाके से आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना हुआ है। डॉक्टरों ने उनकी आंखों में भी एमनियोटिक मेम्ब्रेन लगाई है।
- योगेश कुशवाहा (14 साल): कार्बाइड डालने के बाद धमाका हुआ और उसका पूरा चेहरा जल गया। योगेश की मां रोते हुए कह रही हैं कि इस बंदूक को तुरंत प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
इलाज की प्रक्रिया और चिंता
हमीदिया अस्पताल की नेत्र रोग विभाग की HOD डॉ. कविता कुमार के अनुसार, कार्बाइड गन से निकले केमिकल ने आंखों को केमिकल इंजरी पहुंचाई, आग ने पलकों को जलाया और धमाके ने आंखों की संरचना को नुकसान पहुंचाया। कार्बाइड के कारण कॉर्निया पर घाव बन गए हैं, इसलिए रोशनी बचाने के लिए एमनियोटिक मेम्ब्रेन लगाकर कॉर्निया को ठीक करने की कोशिश की जा रही है। डॉ. अदिति दुबे भी इन गंभीर मामलों में इलाज की प्रक्रिया समझा रही हैं।
गन बनाने का तरीका
यह बंदूक बिना किसी विज्ञापन के खतरनाक ट्रेंड की तरह सोशल मीडिया के माध्यम से फेमस हुई। इस बंदूक को बनाने में PVC पाइप के छेद में कैल्शियम कार्बाइड डालकर पानी की बूंदें डालने से एसिटिलीन गैस बनती है, जो धमाके के साथ बाहर निकलती है और अपने साथ सल्फर एवं PVC के टुकड़ों को आंखों में पहुंचाती है।
16 अक्टूबर से मामले शुरू होने के बावजूद प्रशासन तब जागा जब नुकसान बढ़ चुका था। 18 अक्टूबर को एसडीएम ने जब्त करने की कोशिश की, लेकिन इंडिया टीवी की टीम ने 19 अक्टूबर को भी इसे भोपाल के पॉश इलाके के चौराहे पर खुलेआम बिकते देखा।
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