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उज्जैन में चौड़ीकरण के तहत मस्जिद हटाने का विरोध, शहर के काजी ने दी चेतावनी- 'धार्मिक स्थल न हटाए जाएं'

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारी शुरू हो गई है। इसी बीच चौड़ीकरण के तहत मस्जिद हटाने का विरोध किया जा रहा है और शहर के काजी ने चेतावनी दी है। उन्होंने धार्मिक स्थल हटाने के लिए कहा है।

Opposition to mosque removal- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV मस्जिद हटाने का विरोध

​उज्जैन:  मध्य प्रदेश के ​उज्जैन यानी 'महाकाल की नगरी' में सिंहस्थ 2028 की बड़ी उमंग के साथ तैयारियां चल रही है और शहर के सर्वांगीण विकास के लिए प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस विकास यात्रा में यातायात को सुगम बनाने के लिए मार्ग चौड़ीकरण का कार्य अत्यंत आवश्यक है, जो ​उज्जैन में होने वाला है। हालांकि, ​चौड़ीकरण ने नया मोड़ ले लिया है, जिसका विरोध किया जा रहा है। दरअसल, इस प्रक्रिया के दौरान उज्जैन शहर में अब तक कई मंदिरों को भी विकास की बाधा मानते हुए हटाया गया है, जब ये मंदिर हटाए गए थे तब कुछ हिंदू संगठनों ने प्राथमिक तौर पर विरोध दर्ज कराया था, लेकिन प्रशासन द्वारा विकास की अनिवार्यता और शहर हित का तर्क दिए जाने पर उन्होंने पूर्ण परिपक्वता का परिचय दिया। अब मस्जिद हटाने पर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद शहर के काजी ने चेतावनी भी दी है।

मस्जिद हटाने का हुआ विरोध

हिंदू संगठनों ने राष्ट्रहित और शहर के विकास को सर्वोपरि रखते हुए अपना विरोध वापस ले लिया और विकास की राह को सुगम बनाया, लेकिन मस्जिद हटाने को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। इसके विपरीत, आज शहर की बड़ी सब्जी मंडी स्थित जामा मस्जिद में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। शहर काजी खलीकुर्रहमान ने अल्पसंख्यक समुदाय को भारी संख्या में एकत्रित किया और एक विवादास्पद संबोधन दिया। काजी ने यह तो कहा कि वे शहर के विकास में प्रशासन के साथ हैं, लेकिन साथ ही एक शर्त रख दी कि विकास के नाम पर मस्जिद या मजार को कतई नहीं हटने दिया जाएगा। उन्होंने अन्य धर्मों के स्थलों को न हटाने की बात करते हुए प्रशासन को घेरने की कोशिश की और उन पर निशाना साधा है।

मस्जिद के काजी की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

​शहर काजी का यह दोहरा रवैया और मंच से दी गई खुली चुनौती शहर की शांति के लिए चिंता का विषय बन गई है। एक जिम्मेदार पद पर आसीन व्यक्ति को बयानबाजी करते समय यह भली-भांति सोचना चाहिए कि वे एक समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उनके इस प्रकार के आवेशपूर्ण भाषण से शहर का माहौल बिगड़ सकता है। यदि उन्हें कोई आपत्ति थी या चर्चा करनी थी तो वे समाज के विवेकशील लोगों को साथ लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से मिलनसार वातावरण में बात कर सकते थे। अन्य धर्मों के लोगों को साथ लेकर शांतिपूर्वक अपनी बात रखने के बजाय, इस प्रकार की खुली चुनौती देना विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने और अनावश्यक तनाव फैलाने जैसा है। 

काजी की वजह से रुका चौड़ीकरण का काम 

उज्जैन की जनता काजी से अपेक्षा करती है कि वे शहर में भाईचारे बनाए रखने में सकारात्मक भूमिका निभाएं, न कि विकास कार्यों के आड़े आकर शहर की प्रगति में रोड़े अटकाएं। इस मामले में शहर काजी ने कहा कि चौड़ीकरण को लेकर मुस्लिम समाज ने पूरा सहयोग किया है। परंतु आज के हालात देखते हुए नाइंसाफी का अंदेशा हो रहा है। अधिकारियों ने जो वादे किए वह पूरे नहीं किया, जबकि हम हमारा वादा पूरा कर रहे हैं चश्मे के नंबर बराबर होना चाहिए। एक की नजर तेज और एक की कमजोर हो ऐसा ना हो। कोई भी धार्मिक स्थल ना छेड़ा जाए वरना ठीक नहीं होगा।

(इनपुट प्रेम डोडिया)

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