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Rajat Sharma's Blog | एलपीजी: अफवाहों से सावधान

भारत में कमर्शियल सिलेंडर के संकट की दो वजह हैं। एक तो सप्लाई की कमी और दूसरा, जमाखोरी की आदत। जिसे मौका लगता है अपने लिए दो-चार सिलेंडर दबा कर बैठ जाता है ताकि आने वाले दिनों में संकट का सामना न करना पड़े। कुछ लोग तो गैस सिलेंडर ब्लैक में बेचने का काम भी करने लगे हैं।

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

सरकार ने शुक्रवार को बड़े शहरों में सभी कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं से कहा कि वे अपने स्थानीय पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) प्रोवाइडर से संपर्क करें और पीएनजी कनेक्शन लें। पेट्रोलियम मंत्रालय की अधिकारी सुजाता शर्मा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पीएनजी और सभी उपभोक्ताओं के लिए सीएनजी की सप्लाई में कोई कटौती नहीं की गई है। ऐसे स्थिति में पैनिक की कोई ज़रूरत नहीं है।

अधिकारी ने बताया कि मोजूदा एलपीजी संकट के पीछे मुख्य वजह अपवाहों के कारण लोगों द्वारा पैनिक में की जा रही बुकिंग है। ईरान युद्ध से पहले रोजाना 55।7 लाख एलपीजी की बुकिंग होती थी, जो अब बढ़ कर 75।7 लाख, यानी 20 लाख दैनिक के हिसाब से बढ गई है। मंत्रालय की अधिकारी ने कहा कि सभी पेट्रोल पम्प पर पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है, केवल एलपीजी अभी चिंता का विषय है। इसके बावजूद, हमारे 25,000 एलपीजी वितरकों में से किसी ने भी सिलेंडर स्टॉक खत्म होने की शिकायत नहीं की है।  

मंत्रालय की अधिकारी ने लोगों से फिर अपील की कि वे अपवाहों पर यकीन न करें और पैनिक में खरीदारी न करें। पेट्रोल और डीजल के बारे में अधिकारी ने कहा कि भारत के पास 25।8 करोड़ टन कच्चा तेल रिफाइन करने की क्षमता उपलब्ध है और भारत पेट्रोल और डीजल के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। हमारी सभी रिफायनरी शत प्रतिशत क्षमता के साथ कर रही हैं और सभी के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक है।

सरकार का कहना है कि देश में रोज़ाना 50 लाख गैस सिलेंडर की सप्लाई होती है। भारत 60 प्रतिशत  LPG का आयात करता है और इसमें से 90 प्रतिशत LPG होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुज़रता है। होर्मूज स्ट्रेट बंद है। इसलिए अब सरकार के आदेश पर तेल रिफाइनरियों ने LPG का उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा दिया है।

पैनिक बुकिंग, जमाखोरी और कालाबाजारी की वजह से गैस सिलेंडर की सप्लाई में कठिनाई पैदा हो रही है। यूपी, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से लेकर पंजाब, राजस्थान और दिल्ली में गैस एजेंसियों के सामने लंबी लंबी लाइनें लग रही हैं। साथ ही पुलिस ने छापेमारी कर कई राज्यों में जमाखोरों द्वारा छिपा कर रखे गये सिलेंडर जब्त किए हैं।

दिल्ली, चेन्नई, बैंगलुरू और मुंबई तक सैकड़ों होटल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। कई होटल्स और ढाबों ने गैस के चूल्हे की जगह भट्टियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है ताकि इस संकट में उनका कारोबार चौपट होने से बच जाए। लखनऊ में भट्टियों की मांग बढ़ गई है। दिल्ली में भी कई छोटे होटल और रेस्तरां ने गैस चूल्हे के बजाय भट्टियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

भारत में कमर्शियल सिलेंडर के संकट की दो वजह हैं। एक तो सप्लाई  की कमी और दूसरा, जमाखोरी की आदत। जिसे मौका लगता है अपने लिए दो-चार सिलेंडर दबा कर बैठ जाता है ताकि आने वाले दिनों में संकट का सामना न करना पड़े। कुछ लोग तो गैस सिलेंडर ब्लैक में बेचने का काम भी करने लगे हैं। लेकिन कैंटीन और छोटे होटल चलाने वालों की परेशानी जायज़ है। वे अपने कारोबार पर चोट बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसीलिए उनकी मदद कैसे की जा सकती है, इस पर सरकार को विचार करना चाहिए।

पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई पर नजर रखने के लिए मंत्रियों की जो कमेटी गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बनी है, उसकी जिम्मेदारी है कि जमीनी स्तर पर समस्याओं को समझकर उसका हल  निकालें। ये इसीलिए भी जरूरी है कि क्योंकि खाड़ी में हालात कब सुधरेंगे। ये जंग कब खत्म होगी किसी को नहीं मालूम।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से गुरुवार को जंग से पैदा हुए हालात के बारे में बात की थी। शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरग़ची से चौथी बार फोन पर बात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीति की सारी लाइनें खुली रखी हैं। यही सबसे अच्छी कूटनीति है, जहां भारत को फायदा दिखेगा, वह उसी लाइन का इस्तेमाल करेगा। ये क्या कम बड़ी बात है कि जब पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, भारत में पेट्रोल डीजल का दाम एक पैसा भी नहीं बढ़ाया गया। अन्तरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत शुक्रवार को 101 से 102 डालर प्रति बैरल के बीच थी।

ईरान जंग का आज 14वां दिन है और अभी तक जंग रुकने के आसान नज़र नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार को इज़राइल ने फिर ईरान पर भीषण बमबारी की। जवाब में ईरान ने दुबई में इंटरनेशनल फिनेंशियल सेंटर ज़ोन पर ड्रोन से हमला किया। इस हमले में DIFC Innovation Hub इमारत के कुछ हिस्से में आग लग गई और बिल्डिंग के बारी हिस्से को नुकसान पहुंचा। DIFC एक इकोनोमिक फ्री ज़ोन है, जहां दुनिया भर के बड़े बैंक और वित्तीय संस्थानों के दफ्तर हैं, साथ में इस इमरात में बड़े रेस्तरां और नाइटक्लब भी हैं।

ईरानी सेना ने दो दिन पहले धमकी दी थी कि सेना खाड़ी के देशों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर हमला करेगी क्योंकि इजराइल ने पिछले दिनों तेहरान में एक बैंक पर बमबारी की थी। उधर इराक के इरबिल में फ्रांस के एक अड्डे पर हुए हमले में एक फ्रांसीसी सैनिक मारा गया और 6 अन्य सैनिक घायल हो गये। फ्रांस के ये सैनिक इस्लामिक स्टेट आतंकवादियों से मुकाबले के लिए तैनात थे।

शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को अभी और सबक सिखाया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है, आयतुल्लाह मुज्तबा खामेनेई ज़ख्मी है, पर ज़िंदा हैं। गुरुवार को मुज्तबा खामेनेई ने ईरान के टेलीविजन पर प्रसारित अपने लिखित बयान में कहा था कि ईरान अमेरीकी और इज़राइली हमलों में मारे गए लोगों का बदला जरूर लेगा। खामेनेई ने मांग की कि जिन देशों ने हम पर युद्ध थोपा है, वो हमें हर्जाना दे वरना हम उन पर हमला जारी रखेंगे। खामेनेई ने कहा कि हॉर्मुज़ स्ट्रेट अभी बंद रहेगा और जहाजों के यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा।

इसमें कोई शक नहीं कि ट्रंप तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में हैं। ये भी सही है कि उनका जो ‘Make America Great Again’ का नारा था, वो भी इस युद्ध के धुएं में धुंधला पड़ने लगा है। ट्रंप चाहते हैं कि जंग जल्दी खत्म हो लेकिन उनके सलाहकारों का कहना है कि इस समय लड़ाई को रोकना बड़े खतरे का काम है।

अगर ईरान मान भी जाए तो भी जंग रोकने में जोखिम है। अगर ट्रंप जीत का दावा करें, बमबारी रोक दें तो इससे विश्व में बाजार तो सुधर जाएंगे लेकिन ये कम समय के लिये होगा और युद्ध दोबारा शुरू होने का खतरा बना रहेगा क्योंकि इस समय ईरान में जो सरकार है, वो गुस्से में है, वह मुकाबला करना चाहती है और उसके पास एटमी मटीरियल का बड़ा स्टॉक है, मिसाइल और ड्रोन है, अगर उसे थोड़ा समय देकर फिर से मजबूत होकर खड़े होने का मौका मिला तो ईरान तबाही मचा सकता है। इसी डर ने ट्रंप को ये जंग जारी रखने पर मजबूर किया हुआ है।

इजराइल तो बिलकुल नहीं चाहता कि ये जंग रुके क्योंकि ईरान से सबसे बड़ा खतरा इजराइल को ही है। इजराइल तो कहता है कि जब तक ईरान को पूरी तरह नेस्तनाबूद न कर दिया जाए तब तक ये जंग जारी रहनी चाहिए। लेकिन ईरान को जंग लड़ते रहने की आदत है, अमेरिका को नहीं। यही इस समय ट्रंप और अमेरिका की सबसे बड़ी समस्या है। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 12 मार्च, 2026 का पूरा एपिसोड