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उद्धव ठाकरे ने बुलाई सांसदों की बैठक, ऑपरेशन टाइगर की अटकलों के बीच बड़ा फैसला

महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की चर्चा जोरों से हो रही है। सूत्रों ने दावा किया है कि शिवसेना यूबीटी के 7 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संपर्क में हैं। ऑपरेशन टाइगर की अटकलों के बीच अब उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाई है।

Uddhav Thackeray calls meeting of party MPs - India TV Hindi
Image Source : PTI उद्धव ठाकरे ने बुलाई सांसदों की बैठक। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से तेज हलचल शुरू हो गई है। ऐसी अटकलें लगाईं जा रही हैं कि उद्धव ठाकरे की पार्टी फिर से टूट सकती है और उनके कई सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संपर्क में हैं। ऐसे में राज्य में ऑपरेशन टाइगर की अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाई है। ये बैठक रविवार 14 जून को दोपहर 12 बजे मातोश्री में बुलाई गई है। उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी के सांसदों के शिंदे शिवसेना के संपर्क में होने की खबरों और अटकलों को देखते हुए ये मीटिंग काफ़ी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि शिवसेना यूबीटी के 7 सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, 7 जून को दिल्ली में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और ठाकरे गुट के कुछ सांसदों के बीच एक गुप्त बैठक भी आयोजित की गई थी। दावा किया गया है शिवसेना यूबीटी के एक सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दिलाने और अन्य सांसदों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और पद देने की बात कही गई है।

भाजपा ने क्या कहा?

महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच बीजेपी नेता प्रवीण दारेकर ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी कोई कमजोर पार्टी नहीं है और जो नेता सिर्फ घर बैठकर राजनीति करते हैं, उनसे लोग तंग आ चुके हैं। दारेकर के मुताबिक, जो जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता के बीच काम करना चाहते हैं, वे स्वेच्छा से बीजेपी के साथ जुड़ना चाहते हैं और पार्टी ने किसी पर कोई दबाव नहीं बनाया है।

कांग्रेस क्या बोली?

उद्धव ठाकरे की पार्टी में टूट की अटकलों पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी बयान जारी किया है। ऑपरेशन टाइगर को लेकर सपकाल ने कहा- "भाजपा और उसके सहयोगी दल जिस तरह की जोड़-तोड़ और दल-बदल की राजनीति करते हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि वे राजनीतिक रूप से कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में मजबूत होती तो उसे विपक्षी दलों को तोड़ने और उनके नेताओं को अपने साथ लाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन ऐसा करना उनकी मजबूरी है, क्योंकि वे अपनी कमजोरी छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।"

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