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"शरद पवार पहल करें, कांग्रेस में विलय करें समान विचारधारा वाले दल", विपक्षी एकता पर संजय राउत का बड़ा दांव

 Reported By: Sachin Chaudhary Edited By: Malaika Imam
 Published : Jun 11, 2026 11:36 pm IST,  Updated : Jun 11, 2026 11:41 pm IST

विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए संजय राउत ने एक बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से अलग होकर बने दलों को अब एक साथ आ जाना चाहिए।

संजय राउत- India TV Hindi
संजय राउत Image Source : REPORTER INPUT

महाराष्ट्र के सियासी गलियारे से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां इन दिनों विपक्षी एकजुटता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिवसेना-UBT के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बड़ा बयान देते हुए सुझाव दिया है कि कांग्रेस से अलग होकर बने दलों को अब एक साथ आ जाना चाहिए। उन्होंने NCP-शरद चंद्र पवार सहित अन्य समान विचारधारा वाले दलों के कांग्रेस में विलय या साथ आने की वकालत की है।

संजय राउत ने कहा कि देश में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक मजबूत विकल्प खड़ा करने के लिए 'अखंड कांग्रेस' का होना बेहद जरूरी है। संजय राउत ने देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर बात करते हुए कहा, "एक मजबूत और अखंड कांग्रेस को देश के भीतर एक प्रबल विकल्प के रूप में खड़ा रहना चाहिए।"

पवार साहब को आगे आना चाहिए: राउत

राउत ने कहा कि इस बड़े कदम के लिए शरद पवार को ही आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा, "पवार साहब को इस संदर्भ में आगे आना चाहिए और पहल करनी चाहिए। माननीय शरद पवार जी... यह जो विचारधारा या भूमिका बन रही है, एक साथ आने की... उस संदर्भ में अगर उन्होंने नेतृत्व किया और पहल की, तो यह विचार बहुत आगे जाएगा।"

"वे आज भी कांग्रेस की विचारधारा पर चल रहे"

जब संजय राउत से सवाल किया गया कि क्या उनके इस बयान का मतलब यह है कि शरद पवार की एनसीपी को कांग्रेस के साथ चले जाना चाहिए? इस पर राउत ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जो दल कभी कांग्रेस से ही अलग हुए थे, वे आज भी उसी विचारधारा पर काम कर रहे हैं। संजय राउत के मुताबिक, जो दल कुछ कारणों से कांग्रेस से बाहर निकले थे, वे आज भी कांग्रेस की विचारधारा पर ही चल रहे हैं। ये सभी दल आज भी सरकार में या विपक्ष में रहकर अनेक मोर्चों पर एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अगर ये सभी दल एक साथ आ जाते हैं, तो कपट और साजिश के माध्यम से देश पर लादे गए भ्रष्ट शासन के खिलाफ एक बहुत बड़ा विकल्प खड़ा किया जा सकता है।

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