इन दिनों काफी एनआरआई और विदेश में काम कर रहे भारतीय अपने वतन वापस लौट रहे हैं। मुख्य कारणों में भारत की तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप बूम और बेहतर करियर ऑपर्चुनिटी शामिल हैं। विदेश में वीजा बैकलॉग, H-1B अनिश्चितता और महंगाई को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। इसके अलावा परिवार से जुड़ाव, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और सांस्कृतिक जड़ों की तलब ने भी कई लोगों को घर बुलाया। लोगों मानना है कि भारत अब अवसरों का केंद्र बन रहा है, जहां PPP और सुविधाएं विदेश के बराबर हो रही हैं। यह ट्रेंड युवा पीढ़ी की नई सोच को दर्शाता है। हाल ही में जर्मनी में एक दशक बिताने के बाद एक शख्स भारत लौटा। भारतीय व्यक्ति ने बताया है कि विदेश में एक स्थिर जीवन जीने के बावजूद जिसे कई लोग एक स्थिर जीवन मानते हैं, उसने घर लौटने का फैसला क्यों किया।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @harit.bhasin.official नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में हरित भसीन ने कहा कि, 'जर्मनी में 10 साल बिताने के बाद, हमने एक ऐसा फैसला लिया जिसने कई लोगों को चौंका दिया। हमने अपना सारा सामान समेटा, उस देश को छोड़ दिया जहां हमारे बच्चे पैदा हुए थे, और वापस भारत आ गए।' उन्होंने बताया कि कई लोग उनसे पूछते थे कि क्या उन्हें जर्मनी नापसंद हो गया है। उन्होंने कहा कि उनका जवाब सीधा-सादा था। "जर्मनी हमेशा मेरे दिल में एक खास जगह रखेगा।" जन्मभूमि और कर्मभूमि की भारतीय अवधारणाओं का जिक्र करते हुए, भासिन ने उन सभी चीजों पर विचार किया जो जर्मनी ने उन्हें पिछले एक दशक में दी हैं। उन्होंने लिखा, "जर्मनी ने मुझे 10 खूबसूरत साल दिए" और आगे कहा कि उन्होंने पेशेवर रूप से तरक्की की, उनके बच्चे वहीं पैदा हुए, उनके परिवार ने यादगार पल बनाए, वे अद्भुत लोगों से मिले, और इस अनुभव ने उन्हें और मजबूत बनने में मदद की।
आखिर क्यों लौटना पड़ा भारत
उन्होंने लिखा, 'यह कदम इसलिए नहीं उठाया गया क्योंकि हमें जर्मनी पसंद नहीं था। बल्कि इसलिए उठाया गया क्योंकि भारत हमें वापस बुला रहा था। हम अपने परिवार के करीब रहना चाहते थे।' भसीन ने यह भी कहा कि, 'हम चाहते थे कि हमारे बच्चे जीवन के दोनों पहलुओं को देखें जर्मनी का अनुशासन और वैश्विक अनुभव, और भारत की गर्मजोशी, संस्कृति और पारिवारिक बंधन।' उन्होंने लिखा, 'कई लोगों ने पूछा क्या आप हमेशा के लिए वापस आ रहे हैं? जी हां, यह एक सुनियोजित कदम है। डर या दबाव के कारण नहीं, बल्कि परिवार, जड़ों और जीवन के एक स्पष्ट निर्णय के कारण।' उन्होंने कहा कि, 'जर्मनी एक ऐसा अध्याय नहीं है जिसे मैं दूरी के साथ समाप्त कर रहा हूं। यह एक ऐसा अध्याय है जिसे मैं हमेशा कृतज्ञता के साथ संजो कर रखूँगा। भारत सिर्फ एक जगह नहीं है जहां मैं लौट रहा हूं। यह मेरा घर है। दो देश। दो घर। एक दिल।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस पोस्ट ने सोशल मीडिया के कई यूजर्स को प्रभावित किया, जिनमें से कई ने अपने समान अनुभव साझा किए। एक यूजर ने कमेंट किया, "मैं 5 साल बाद जाने की योजना बना रहा हूं, पता नहीं क्या होगा।"
एक अन्य ने लिखा, "शानदार कदम," जबकि तीसरे ने बस इतना कहा, "सबसे अच्छा निर्णय।"
एक अन्य यूजर ने भी इसी तरह का अनुभव साझा करते हुए लिखा, "हम भी हाल ही में स्वीडन से 6 साल बिताने के बाद अपनी 4.5 साल की बेटी के साथ यहाँ आए हैं और अपने फैसले से खुश हैं। आपको भी शुभकामनाएं।"
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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