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मुंबई में किराए का घर खोजने के लिए नहीं होगी झंझट, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ले लिया बड़ा फैसला

भारत की आर्थिक नगरी मुंबई में किराए के घरों की मांग तेजी से बढ़ती चली जा रही है। ऐसे में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐसा फैसला लिया है जिससे लोगों को किराए के घर खोजने के लिए दिक्कत नहीं होगी।

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Image Source : PTI महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा फैसला। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बढ़ती आबादी और किफायती आवास की चुनौती के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाड़े के किफायती घरों के लिए मजबूत और पारदर्शी सिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई सहित बड़े शहरों में नौकरी और व्यवसाय के लिए बड़ी संख्या में लोग बाहर से आते हैं। ऐसे में उनके लिए सस्ती दरों पर किराये के घर उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार एक डिजिटल पोर्टल विकसित करने जा रही है, जहां किराये के घरों की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी।

सीएम ने की डिमांड और सप्लाई की बात

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया है कि इस पोर्टल के जरिए किरायेदार और मकान मालिक दोनों को आसानी से जानकारी और सुविधा मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘डिमांड और सप्लाई’ के सिद्धांत पर किराये के घर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी भी नागरिक को घर ढूंढने में परेशानी न हो।उन्होंने यह भी कहा कि किरायेदारी से जुड़े सभी समझौतों और प्रक्रियाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाए, जिससे विवाद की स्थिति कम हो सके।

100 विशेष अदालतें स्थापित करने की योजना

बैठक में महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम 1999 को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस उपायुक्तों को ‘सक्षम प्राधिकारी’ नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया गया है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया और तेज होगी। इसके साथ ही किराये से जुड़े विवादों के त्वरित निपटारे के लिए 100 विशेष अदालतें स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इन अदालतों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाएगी।

 लंबित मामलों को जल्द खत्म करने की तैयारी

बैठक में लंबे समय से लंबित मामलों को जल्द खत्म करने के लिए शाम के समय विशेष अदालतें चलाने का भी सुझाव दिया गया है। जरूरत पड़ने पर इन अदालतों के लिए अलग से स्थान किराये पर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो मकान मालिक और किरायेदार- दोनों को बड़ी राहत मिलेगी और वर्षों से लंबित विवाद भी खत्म हो सकेंगे।

इस बैठक में गृह निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस आयुक्त और अन्य विभागों के प्रमुख भी मौजूद रहे, जहां इस योजना को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल मुंबई में किफायती किराये के घरों की समस्या को हल करने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम साबित हो सकती है।

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