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"मराठी सीखने से इनकार सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी", रिक्शा-टैक्सी चालकों को परिवहन मंत्री की चेतावनी

परिवहन मंत्री ने कहा कि कुछ रिक्शा-टैक्सी चालकों ने वीडियो बनाकर कहा कि वे मराठी नहीं सीखेंगे, सरकार को जो करना है, कर ले। उन्होंने कहा कि इस तरह की मुंहजोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Pratap Sarnaik- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि जो रिक्शा और टैक्सी चालक मराठी सीखने से इनकार करेंगे और मनमानी करेंगे, सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे चालकों के खिलाफ कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की जाएगी।

सरनाईक के मुताबिक, राज्य में टैक्सी और रिक्शा चालकों के लिए पिछले 105 दिनों से मराठी सीखने का अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 1 लाख 65 हजार रिक्शा-टैक्सी चालकों ने मराठी सीखी है और उन्हें प्रमाणपत्र भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को भी यहां रोजगार मिलना चाहिए। मुंबई में सभी को समायोजित करने की क्षमता है, लेकिन राज्य की भाषा मराठी का प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए।

मुंहजोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी: परिवहन मंत्री 

परिवहन मंत्री ने कहा कि कुछ रिक्शा-टैक्सी चालकों ने वीडियो बनाकर कहा कि वे मराठी नहीं सीखेंगे और सरकार को जो करना है, कर ले, तो इस तरह की मुंहजोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर एक महीने का नोटिस देने और उसके बाद तीन महीने के लिए लाइसेंस निलंबित करने के बावजूद मराठी नहीं सीखते हैं, तो यह माना जाएगा कि वे मराठी भाषा से नफरत करते हैं। ऐसी स्थिति में उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा।

मराठी बोलना आता है या नहीं, तभी मिलेगा बैज

सरनाईक ने कहा कि कल से लाइसेंस के बाद चालकों को जो बैज दिया जाता है, उसके लिए "क्या आपको मराठी बोलना आता है?" यह भी जांचा जाएगा। इसके बाद ही बैज जारी किया जाएगा। आरटीओ के वायुवेग पथक के जरिए रैंडम चेकिंग की जाएगी और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। मैं कानून के दायरे में रहकर काम कर रहा हूं। किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री के अधिकार पर भी बोले सरनाईक

प्रताप सरनाईक ने मुख्यमंत्री के मंत्रियों के फैसलों में हस्तक्षेप करने के अधिकार को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मंत्रियों के फैसले में हस्तक्षेप कर सकते हैं और पहले भी ऐसा होता रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में काम करते समय मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल और राज्य के प्रमुख होते हैं। अगर मुख्यमंत्री को किसी मंत्री का कोई फैसला उचित नहीं लगता है, तो वे निश्चित रूप से उसमें बदलाव कर सकते हैं। यह उनका अधिकार है।

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