मुंबईः महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज़ है। अटकलें हैं कि शरद पवार की एनसीपी (शरद पवार) नया राजनीतिक रास्ता तलाश रही है। चर्चा है कि कांग्रेस में विलय की संभावना कमजोर पड़ने के बाद पार्टी अब सत्ता पक्ष यानी एनडीए के साथ जाने के विकल्प पर भी मंथन कर रही है। हालांकि पार्टी इन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (शरद पवार) ने कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव दो बार दिया था। बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से चर्चा करने को कहा। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश इकाई से राय लेने की बात कही। जिसके बाद महाराष्ट्र कांग्रेस के अधिकांश नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध कर दिया। इसके चलते विलय की संभावना फिलहाल कमजोर मानी जा रही है।
कई विधायक और सांसद एनडीए के साथ जाने के पक्ष में
इसी बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कुछ सांसद और विधायक सत्ता पक्ष के साथ जाने या बाहर से समर्थन देने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। यहां तक कि सुप्रिया सुले समेत कुछ सांसदों के एनडीए में जाने और केंद्र में अहम जिम्मेदारी मिलने जैसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शरद पवार गुट ने बताया अफवाह
एनसीपी एसपी नेता रोहित पवार ने इन तमाम चर्चाओं को पूरी तरह अफवाह बताया। उनका कहना है कि न तो पार्टी का कांग्रेस में विलय होगा और न ही एनडीए में शामिल होने या बाहर से समर्थन देने का कोई सवाल है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ राजनीतिक अटकलें हैं जिनमें कोई सच्चाई नहीं है।
वहीं, कांग्रेस नेता अमित देशमुख ने कहा कि अभी ये सिर्फ चर्चाएं अटकलें ही है। जब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आती, तब तक इस विषय पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि शरद पवार अपनी विचारधारा के अनुरूप महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी और राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन के साथ ही रहेंगे।
बीजेपी की तरफ से भी आया बयान
दूसरी ओर बीजेपी ने इन अटकलों का स्वागत करने के संकेत दिए हैं। पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि कांग्रेस अब डूबती नाव बन चुकी है और अगर शरद पवार की पार्टी देशहित में एनडीए के साथ आना चाहती है तो उनका स्वागत है। फिलहाल एनसीपी (शरद पवार) इन सभी चर्चाओं को लगातार खारिज कर रही है और किसी भी तरह के राजनीतिक बदलाव से इनकार कर रही है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में समीकरण कब बदल जाएं, यह कहना मुश्किल है। ऐसे में शरद पवार की पार्टी भविष्य में कौन-सा राजनीतिक फैसला लेती है या नहीं इस पर नहरे टिकी है।
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