नई दिल्ली: दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क की कंपनी टेस्ला ने अपनी नई रोडस्टर कार का एक ऐसा वीडियो जारी किया है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है। वीडियो में कार घुमावदार रैंप पर चढ़ती है, पलटती है और कुछ देर हवा में रहने के बाद सुरक्षित जमीन पर उतर जाती है। इसे फ्लाइंग कार के तौर पर पेश किया जा रहा है। हालांकि, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने इस प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई गई कलाबाजी को प्रोडक्शन के लेवल पर ला पाना मुश्किल है।
रॉकेट की तरह उड़ने का दावा, एक सेकेंड में 97 KM की रफ्तार!
एलन मस्क ने रोडस्टर को लेकर दावा किया है कि इसमें रॉकेट में इस्तेमाल होने वाले थ्रस्टर्स लगाए गए हैं। ये ऐसे उपकरण होते हैं, जो तेज दबाव से गैस बाहर निकालकर धक्का पैदा करते हैं। टेस्ला की ओर से दावा किया गया है कि यह कार एक सेकेंड से भी कम समय में करीब 97 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। कंपनी के मुताबिक, रोडस्टर का प्रोडक्शन 2028 में शुरू होगा। हालांकि, कार के प्रदर्शन और दावों को लेकर अभी सवाल बने हुए हैं। खासकर हवा में उड़ने, पलटने और फिर सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतरने जैसी क्षमताओं को लेकर विशेषज्ञों ने संदेह जताया है।
ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन बोले, 'मनोरंजन के लिए अच्छा वीडियो'
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ टूटू धवन ने टेस्ला के वीडियो पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मनोरंजन और विज्ञापन के लिहाज से अच्छा हो सकता है, लेकिन असल जिंदगी में ऐसा कर पाना संभव नहीं लगता। उनके मुताबिक, किसी कार को रॉकेट की तरह उड़ते हुए दिखाने से यह साबित नहीं होता कि वह वास्तव में ऐसा कर सकती है। धवन ने कहा,
'वीडियो में जिस तरह कारें एक ट्रक के ऊपर से निकलती दिखाई गई हैं और कलाबाजी करने के बाद सीधी खड़ी हो जाती हैं, वैसा असल में होना मुश्किल है। कारें कोई कलाबाजी करने वाले कलाकार नहीं हैं, जिन्हें इस तरह पलटकर सीधा खड़ा कराया जा सके। ऐसा लगता है कि इस वीडियो को मुख्य रूप से विज्ञापन के उद्देश्य से बनाया गया है।'
स्टारलिंक को लेकर भी एलन मस्क पर उठे सवाल
एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की कार को लेकर उठे सवालों के बीच उनकी दूसरी कंपनी स्टारलिंक की भूमिका भी चर्चा में है। यूक्रेन में युद्ध के दौरान स्टारलिंक की सेवाओं और उनके इस्तेमाल को लेकर पहले भी विवाद सामने आए हैं। आलोचकों ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन की सैन्य जरूरतों के बीच सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की उपलब्धता या गति में बदलाव से उसकी सैन्य क्षमताओं पर असर पड़ सकता है। इस मामले में मस्क ने कथित तौर पर कहा कि सेवा पर नियंत्रण उनके हाथ में नहीं, बल्कि पेंटागन के पास है।
भारत में टेस्ला और मस्क की कंपनियों को लेकर सवाल
बता दें कि यूक्रेन से जुड़े स्टारलिंक विवाद के बाद भारत में भी सवाल उठ रहे हैं कि मस्क की कंपनियों को देश में कारोबार करने की इजाजत देते समय किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। लोगों की चिंता यह है कि किसी कंपनी की तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, उसकी सेवाओं पर निर्भरता बढ़ने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, जवाबदेही और सेवा पर नियंत्रण जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
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