Elon Musk एक तरफ अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। वहीं, यूक्रेन की सेना को लगे झटके ने पूरी दुनिया को स्टारलिंक की सर्विस का दूसरा पहलू दिखाया है। एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस StarShield (स्टारलिंक का मिलिट्री वर्जन) की इंटरनेट स्पीड को बिना किसी पूर्व सूचना के कम कर दी गई। इसकी वजह से यूक्रेनी सेना का एक महत्वपूर्ण ड्रोन मिशन प्रभावित हुआ। इंटरनेट स्पीड स्लो होने की वजह से 160 किलोमीटर प्रति घंटे से चलने वाले ड्रोन की स्पीड कम होने लगी। हालांकि, इसका खामियाजा रूसी मिलिट्री को भी भुगतना पड़ा है।
Starlink पर पहले भी लग चुके आरोप
एलन मस्क की कंपनी पर पहले भी कई बार सर्विस को कंट्रोल करने और ब्लॉक करने का आरोप लग चुका है। स्टारलिंक के टर्मिनल ड्रोन पर लगाकर जैमिंग से बचा गया और लंबी दूरी तक के सटीक हमलों को अंजाम दिया गया है। स्टारलिंक पर डेटा चोरी और जासूसी के सीधे आरोप पर भी लगे हैं। कंपनी पर मुख्य तौर पर सर्विस कंट्रोल करने और सिस्टम को ब्लॉक करने का आरोप भी लग चुका है।
Starlink LEO ऑर्बिट में धरती के चारों ओर घूम रहे हजारों सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल करके इंटरनेट सर्विस पहुंचाता है। सैटेलाइट से निकलने वाले बीम्स का इस्तेमाल कम्युनिकेशन के लिए किया जाता है। क्योंकि सैटेलाइट तेजी से मूव करती है और उससे निकलने वाली बीम बेहद पतली होती है, जिसकी वजह से ड्रोन ऑपरेटर इसकी मदद से उसे लंबी दूरी तर ऑपरेट करने में सक्षम होते हैं।

यूक्रेन वाली घटना से क्या मिला सबक?
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक यूक्रेन को अफोर्डेबल जैमिंग-रोधी कम्युनिकेशन उपलब्ध कराई हैं। इसके लिए स्टारलिंक के हजारों टर्मिनल फ्रंटलाइन पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पौलेंड की तरफ से यूक्रेन को 29,000 टर्मिनल उपलब्ध कराया है। इस तरह से लगभग 1 लाख से ज्यादा टर्मिनल्स यूक्रेन द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हालांकि, जब स्टारलिंक जैसी निजी कंपनी या अमेरिकी सरकार इन टर्मिनल के स्विच कंट्रोल करती है तो यह पूरे सिस्टम को कमजोर बना सकता है। ऐसे में युद्ध के दौरान एक नए तरह का खतरा पैदा हो सकता है, क्योंकि मॉडर्न वॉरफेयर में कम्युनिकेशन का महत्वपूर्ण है।
वहीं, दुनिया के देशों को स्टारलिंक जैसी कमर्शियल सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए रेगुलेशन और कंट्रोल बेहद जरूरी है। अगर, इसे कंट्रोल नहीं किया जाएगा तो बड़े युद्ध का खतरा बढ़ सकता है। यूरोपी संघ ने स्टारलिंक के अलावा IRIS जैसे स्वदेशी और मल्टीलेटरल यानी बहुपक्षीय सैटेलाइट सिस्टम पर जोर दिया है। दुनिया को भी यूक्रेन की इस घटना से सबक लेते हुए Multilateral सिस्टम पर ध्यान देना चाहिए।

एलन मस्क ने दी सफाई
StarShield की इंटरनेट स्पीड कम होने वाले मामले पर अब एलन मस्क ने सफाई दी है और कहा कि यह अमेरिकी सरकार और सेना के नियंत्रण में है। इसकी स्पीड को बढ़ाना और घटाना पूरी तरह से अमेरिकी सेना और अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर निर्भर है। इसका Starlink से कोई लेना-देना नहीं है। स्टारलिंक एक कमर्शियल सर्विस है, जिसका इस्तेमाल आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जा सकता है।
कितनी खतरनाक हो सकती है सर्विस?
तक्षशिला इंस्टीट्यूशन ने अपनी रिपोर्ट में भी Starlink के संभावित खतरे के बारे में बताए हैं और सरकार से सुरक्षा मंजूरी देने से पहले इनके बारे में विचार करने का आग्रह किया है। Starlink के अवैध टर्मिनल सरकार के सर्विस बंद करने के आदेश के बाद भी एक्टिव रह सकते हैं, जिसकी वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा हो सकता है। बाहरी कंट्रोल होन की वजह से जरूरत के समय में इसकी सर्विस को बंद किया जा सकता है। इसके अलावा डेटा का इस्तेमाल भारतीय हितों के विरूद्ध किया जा सकता है।
एलन मस्क ने पिछले दिनों Starlink की भारत में सर्विस की देरी को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार पर सवाल उठाए हैं। मस्क ने अपने पोस्ट में कहा कि दुनिया के 195 देशों में स्टारलिंक की सुविधा मिल रही है लेकिन भारत के ऊपर सैटेलाइट की बीम बंद है।
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