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आखिर 11 दिन बाद आधी रात को कैसे खत्म हुआ MPSC छात्रों का आंदोलन, तुकाराम मुंढे का क्या होगा रोल?

 Reported By: Sachin Chaudhary,  Written By: Subhash Kumar
 Published : Oct 12, 2026 04:42 pm IST,  Updated : Oct 12, 2026 05:05 pm IST

महाराष्ट्र में MPSC छात्रों ने अपना आंदोलन रविवार की रात को समाप्त कर दिया है। बता दें कि छात्र पुणे में अपनी मांगों को लेकर 11 दिन से प्रदर्शन कर रहे थे। आइए जानते हैं कि आखिर 11 दिन बाद आधी रात को कैसे खत्म हुआ है छात्रों का ये आंदोलन।

MPSC छात्रों का प्रदर्शन...- India TV Hindi
MPSC छात्रों का प्रदर्शन खत्म। Image Source : PTI/INDIA TV

महाराष्ट्र में 11 दिनों से चल रहा एमपीएससी छात्रों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया। पुणे में आंदोलन कर रहे छात्र पेपर लीक की जांच के साथ आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सरकार ने जांच का भरोसा दिया, लेकिन अध्यक्ष के मुद्दे पर बात अटकी हुई थी। रविवार रात ऐसा क्या हुआ कि छात्रों ने आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया? अध्यक्ष को लेकर क्या रास्ता निकला और सरकार ने छात्रों को क्या-क्या भरोसा दिया? समझिए आंदोलन खत्म होने की पूरी कहानी।

अध्यक्ष के मुद्दे पर अटकी थी बात

एमपीएससी की परीक्षा में गड़बड़ी और ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों ने पुणे में आंदोलन शुरू किया था। छात्रों की मांग थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार इस्तीफा दें। सरकार ने जांच का भरोसा दिया, लेकिन छात्र सिर्फ जांच की घोषणा से संतुष्ट नहीं थे। उनका कहना था कि अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर सरकार और छात्रों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी।

Maharashtra mpsc protest
Image Source : PTIदेवेंद्र फडणवीस ने दिया संविधान का हवाला।

सरकार ने संविधान का हवाला दिया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि एमपीएससी अध्यक्ष को हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत तय प्रक्रिया के बिना अध्यक्ष को सीधे नहीं हटाया जा सकता। सरकार जांच के जरिए मामले की सच्चाई सामने लाना चाहती थी, जबकि छात्र अध्यक्ष के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसी वजह से बातचीत बार-बार अटक रही थी।

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Image Source : PTIछात्रों के प्रदर्शन में पहुंचे थे राज ठाकरे।

आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन

छात्रों के आंदोलन को एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार का समर्थन मिला। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की। दूसरी तरफ, आंदोलन के दौरान छात्रों पर पुलिस मामले दर्ज किए जाने और भूख हड़ताल कर रहे कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने से मामला और गंभीर हो गया। अब छात्रों की मांग सिर्फ पेपर लीक की जांच तक सीमित नहीं थी। वे अध्यक्ष की जवाबदेही और अपने खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग कर रहे थे।

रविवार रात बातचीत में निकला रास्ता

11 अक्टूबर की रात मंत्री शिवेंद्र सिंह राजे भोसले आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उनके साथ विधायक रोहित पवार, विश्वजीत कदम और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। शुरुआत में जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर चर्चा हुई, लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे पर सहमति नहीं बनी। इसके बाद अध्यक्ष विवेक भीमनवार को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने का रास्ता सामने आया। सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेजने का फैसला बताया। इससे छात्रों की तत्काल कार्रवाई की मांग और सरकार की संवैधानिक मजबूरी के बीच एक रास्ता निकला। सरकार के इस फैसले के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने आपस में चर्चा की। आखिरकार 12 अक्टूबर को आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई। यानी आंदोलन खत्म होने की सबसे बड़ी वजह अध्यक्ष के इस्तीफे पर सहमति नहीं, बल्कि उन्हें फिलहाल छुट्टी पर भेजने और दूसरी मांगों पर सरकार के आश्वासन थे।

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Image Source : PTIतुकाराम मुंढे को जांच का जिम्मा।

जांच में तुकाराम मुंढे को बड़ी भूमिका

सरकार ने एमपीएससी मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग बनाने की घोषणा की है। इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जज दिलीप भोंसले करेंगे। वहीं, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का सचिव बनाया गया है। आयोग में रिटायर्ड जज पी. डी. नाईक, अधिकारी लखमी गौतम और सेवानिवृत्त अधिकारी गणेश पाटील को भी शामिल किया गया है। आयोग पेपर लीक के आरोपों, परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया की जांच करेगा। छात्र भी अपने दस्तावेज और सबूत आयोग के सामने रख सकेंगे। आयोग को 60 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

भर्ती और पुलिस मामलों पर भी भरोसा

सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी आश्वासन दिए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पद भरने और 2027 की ग्रुप-C भर्ती में पदों की संख्या दोगुनी करने की बात कही गई है। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन भी दिया गया है। हालांकि, इन फैसलों पर अमल की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेशों से होनी बाकी है। छात्रों ने इन आश्वासनों के आधार पर आंदोलन स्थगित किया है। अब उनकी मांग है कि सरकार अपने वादे समय पर पूरे करे।

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Image Source : PTIआंदोलन खत्म करने के बाद छात्रों ने मनाया जश्न।

आंदोलन खत्म, लेकिन अध्यक्ष पर फैसला बाकी

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि विवेक भीमनवार को छुट्टी पर भेजना और उन्हें स्थायी रूप से पद से हटाना दो अलग-अलग बातें हैं। छात्र अध्यक्ष का इस्तीफा मांग रहे थे, लेकिन फिलहाल सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेजने का फैसला किया है। उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच के निष्कर्षों और संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। 11 दिनों के आंदोलन के बाद पुणे में प्रदर्शन तो रुक गया है, लेकिन छात्रों के सवाल अभी बाकी हैं। क्या 60 दिनों में जांच रिपोर्ट आएगी? क्या पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? क्या भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी? और क्या आयोग के अध्यक्ष पर अंतिम फैसला होगा? अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने वादों को पूरा करने की है। छात्रों ने आंदोलन स्थगित किया है, लेकिन एमपीएससी में पारदर्शिता और जवाबदेही की उनकी मांग अब भी कायम है।

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