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MPSC में सुधार के लिए तुकाराम मुंढे को बड़ी जिम्मेदारी, 10 दिन बाद अभ्यर्थियों का आंदोलन खत्म

 Reported By: Saket Rai,  Written By: Niraj Kumar
 Published : Oct 12, 2026 08:37 am IST,  Updated : Oct 12, 2026 10:08 am IST

महाराष्ट्र में MPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य सरकार ने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग मान ली है। सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को जांच समिति का सचिव नियुक्त किया है।

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तुकाराम मुंढे Image Source : PTI

मुंबई: महाराष्ट्र में एमपीएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने उनकी प्रमुख मांग मान ली है। सरकार ने आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को जांच समिति के सचिव पद पर नियुक्त किया है। पुणे में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इस नियुक्ति की मांग की थी। इसके साथ ही एमपीएससी अभ्यर्थियों ने 11 दिन से चल रहा आंदोलन वापस ले लिया है।  

देर रात महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों और उनके समर्थन में पहुंचे विधायक रोहित पवार से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम भी मौजूद थे। विद्यार्थियों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने विवेक भीमनवार के छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले की जानकारी दी। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने विवेक भीमनवार को पद से नहीं हटाया है।

अध्यक्ष विवेक भीमनवार छुट्टी पर गए

आपको बता दें महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। पुणे में करीब 11 दिनों से आंदोलन कर रहे प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में अध्यक्ष का इस्तीफा भी शामिल था। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग गठित करने और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को इसकी सचिवीय जिम्मेदारी सौंपने पर सहमति जताई है। तुकाराम मुंढे खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) में कमिश्नर पद पर तैनात हैं। सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। 

 पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय आयोग में मुंढे के अलावा पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की अधिकारी लक्ष्मी गौतम, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी डी नाईक को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। भोसले ने प्रदर्शनकारियों को यह भी आश्वासन दिया कि उनकी अन्य मांगों का समाधान किया जाएगा। इन मांगों में कुछ आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेना, तीन वर्षों में 70,000 पदों पर भर्तियां करना, जनवरी में प्रस्तावित 'ग्रुप सी' परीक्षा में सीटों की संख्या बढ़ाना और एमपीएससी के अध्यक्ष एवं सचिव की नियुक्ति से पहले उनके पूर्व रिकॉर्ड की जांच शामिल है। 

60 दिनों के अंदर आएगी जांच रिपोर्ट

इस आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। बता दें कि MPSC अध्यक्ष का पद संवैधानिक पद है। इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार या राज्यपाल सीधे अध्यक्ष को पद से नहीं हटा सकते। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है। ऐसे में जांच आयोग की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाती है, तो संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार आगे का निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल, अध्यक्ष को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने का निर्णय लिया गया है।

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