केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन इस महीने इनोवा का फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश करेगी। ये गाड़ी E100 (100 प्रतिशत एथनॉल) से चलने में पूरी तरह से सक्षम होगी। गडकरी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है, क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण जीवाश्म ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने ये भी दावा किया कि अगले साल तक देश में बिकने वाली कम से कम 35-40 प्रतिशत कार इलेक्ट्रिक होंगी।
भविष्य का ईंधन है ग्रीन हाइड्रोजन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है और भारत स्वच्छ हाइड्रोजन का शुद्ध निर्यातक बन सकता है। पिछले महीने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन अधिसूचित किए थे। इसके तहत E100 फ्यूल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को मंजूरी दी गई है। E100 फ्यूल से गाड़ियां लगभग शुद्ध इथेनॉल पर चल सकती हैं।
E85 या E100 फ्यूल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी E20 या सामान्य पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां
सड़क परिवहन मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल) से ज्यादा और E100 तक के ईंधन का इस्तेमाल सिर्फ उन्हीं गाड़ियों में किया जा सकेगा, जिन्हें इसके लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया है। ये व्यवस्था बाकी गाड़ियों पर लागू नहीं होगी। E20 या सामान्य पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां E85 या E100 फ्यूल का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
मारुति सुजुकी ने पेश की थी देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार
मंत्रालय ने उत्सर्जन से जुड़ी तालिकाओं और परीक्षण प्रावधानों में इस्तेमाल होने वाली वाहन श्रेणियों की कुछ सीमाओं, ईंधन के विनिर्देशों और तकनीकी संदर्भों में बदलाव किए हैं। इसके अलावा, सरकार ने इन बदलावों से प्रभावित हल्के पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के लिए वजन की अधिकतम सीमा 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम कर दी है। इस साल जून में मारुति सुजुकी इंडिया ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार पेश की थी। कंपनी ने वैगन आर का फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किया, जो E20 से लेकर E100 तक के इथेनॉल फ्यूल से चल सकता है।
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