नई दिल्ली। नागर विमानन क्षेत्र के नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि देश में चल रही वाली विमानन कंपनियां बहुत ज्यादा किराया नहीं वसूल रही हैं। यह किसी भी तरह से अवैध, पक्षपातपूर्ण और बहुत ज्यादा नहीं है और टिकट की कीमत बाजार ताकतों के मुताबिक बदलती रहती है।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायाधीश वी. के. राव की पीठ को डीजीसीए ने यह जानकारी दी। डीजीसीए ने कहा कि विमानन अधिनियम के तहत उसके पास हवाई किराया तय करने संबंधी ‘वित्तीय विनियमन’ की शक्तियां नहीं है।
अदालत देश में हवाई किरायों की सीमा तय किए जाने को लेकर दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही है। इसके जवाब में डीजीसीए ने एक हलफनामा दायर कर अपना यह पक्ष रखा है। उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता अधिकार के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता बेजन के. मिश्रा ने यह याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि डीजीसीए समेत अन्य प्राधिकरण हवाई यात्रा के ऊंचे किराये के मामले में ‘मूक दर्शक’ बने हुए हैं।
इस आरोप को नकारते हुए डीजीसीए ने अपने हलफनामे में कहा कि हवाई किराये में समय और मांग के अनुरूप बदलाव आता है।अदालत ने हलफनामे को रिकार्ड में रख लिया है। मामले में अगली सुनवाई नौ अक्तूबर को होगी।
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