नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि भारत मई की शुरुआत तक अपने भूमिगत रणनीतिक आरक्षित तेल भंडारों को भर देगा। विश्व बाजार में कच्चे तेल के सस्ते दाम का लाभ उठाते हुये यह काम किया जा रहा है। पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में किसी तरह की अड़चन आने की स्थिति से निपटने के लिये देश में इन रणनीतिक भंडार सुविधाओं का निर्माण किया गया है। करीब 54 लाख टन क्षमता के इन आपात भंडारों से देश की दस दिन की तेल आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है। ये रणनीतिक भंडार कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से विश्व बाजार में सस्ते भाव पर उपलब्ध कच्चे तेल की खरीदारी कर इन भंडारों को भरने के लिये कहा गया है।
इंडियन आयल कार्पोरेशन ने इस प्रकार का पहला आयात 10 लाख बैरल तेल का यूएई से इस सप्ताह किया है। विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम इस साल जनवरी के बाद से 60 प्रतिशत से अधिक गिरकर 32 डालर प्रति बैरल के आसपास चल रहे हैं। हालांकि, कच्चे तेल के दाम को बढ़ाने के लिये प्रमुख तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक तथा अन्य देशों ने उत्पादन में एक करोड़ टन की भारी कटौती करने का फैसला कियाय है। इसके बावजूद तेल के दाम अभी भी पुराने स्तर के आसपास ही बने हुये हैं।
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