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Fed Effect: अब राजन भी बोले अमेरिका में बढ़ेंगी ब्‍याज दरें, जानिए इस बदलाव का आप पर क्‍या होगा असर

आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगले हफ्ते 0.25 फीसदी ब्याज दरों बढ़ोत्तरी कर सकता है। इसका असर सीधा असर भारत पर पड़ेगा।

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Fed Effect: अब राजन भी बोले अमेरिका में बढ़ेंगी ब्‍याज दरें, जानिए इस बदलाव का आप पर क्‍या होगा असर

नई दिल्ली। दुनियाभर के एक्सपर्ट के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगले हफ्ते 0.25 फीसदी ब्याज दरों बढ़ोत्तरी कर सकता है। इसका असर सीधा असर भारत पर पड़ेगा। अमेरिका में दरें बढ़ने से डॉलर मजबूत होगा और रुपया कमजोर। इसके कारण ग्लोबल स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में आने वाली गिरावट का पूरा फायदा हमें नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा विदेशी निवेश बड़े पैमाने पर अपना पैसा बाजार से निकाल सकते हैं। इसे सीधे शब्दों में समझे तो आयात होने वाली सभी चीजे जैसे, क्रूड ऑयल, खाद्य तेल और इलेक्ट्रोनिक आइटम महंगे हो सकते हैं। वहीं, विदेशी निवेशकों ने पैसा निकाला तो शेयर बाजार में गिरावट आएगी।

आरबीआई ने कहा हम किसी भी प्रस्थिति से निपटने के लिए हैं तैयार

गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि हम फेडरल रिजर्व के इस फैसले से उत्पन्न किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार हैं। राजन ने कहा, फेड ने जमीन तैयार कर दी है और हमें लग रहा है कि वह नीतिगत ब्याज दर में 0.01 फीसदी से 0.25 फीसदी की वृद्धि करेगा। उन्होंने कहा कि ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना 70 से 75 फीसदी है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि यह करीब-करीब तय है कि फेडरल रिजर्व अगले सप्ताह ब्याज दर बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि बाजार में वित्तीय प्रवाह में कुछ बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। राजन ने कहा, फेडरल रिजर्व जो भी फैसला करता है, हम किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार हैं।

एक्सपर्ट्स ने कहा फायदा कम नुकसान ज्यादा

केडिया कमोडिटी के एमडी अजय केडिया ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट और गहरा सकती है। केडिया के मुताबिक अगर ब्याज दरें बढ़ी तो एक डॉलर की कीमत 68.40 रुपए तक पहुंच सकती है। ऐसे में प्रमुख करेंस के मुकाबले डॉलर में आई मजबूती के कारण क्रूड और सोने की कीमतों में जो गिरावट आएगी उसका पूरा फायदा भारत को नहीं मिलेगा।

एसएमसी के रिसर्च हेड रवि सिंह ने बाताया कि डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट की वजह से ही क्रूड सस्ता होने के वाबजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इतनी कटौती नहीं हुई है, जितनी होना चाहिए थी। दूसरी ओर मजबूत डॉलर से सोने की कीमतें ग्लोबल बाजार में 6 साल के निचले स्तर आ गए हैं, लेकिन घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली है।

इलेक्ट्रोनिक आइटम पर पड़ेगी महंगाई की मार 

मुबंई के इलेक्ट्रोनिक प्रोडक्ट इंपोर्टर सुनिल शाह ने बताया कि कमजोर रुपए का सीधा असर इंपोर्ट होने वाले सभी प्रोडक्ट पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि खासकर इलेक्ट्रोनिक आइटम जैसे कैमरा, मोबाइल और लैपटॉप की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा इनसे जुड़े पार्ट्स भी महंगे हो जाएंगे।

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