नई दिल्ली। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद लगाए देश को आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन खुश करेंगे या निराश ये अब से कुछ देर में पता चल जाएगा। अक्सर अपनी कार्यशैली से सबको चौंका देने वाले राजन इस बार अपनी बंद मुट्ठी से क्या निकालते हैं, इस पर देश ही नहीं दुनियाभर की नजर है। सस्ते होम और ऑटो लोन का रास्ता खुलेगा या नहीं ये आज होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के बाद ही पता चलेगा। लेकिन दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों की माने तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नीतिगत दरों में 25 से 50 आधार अंकों की कटौती कर सकता है। इसके पीछे दो मजबूत कारण हैं। पहला सरकार वित्त वर्ष 2015-16 के राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.9 फीसदी के स्तर पर सीमित रखने पर कायम हैं और दूसरा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति 5-6 फीसदी के दायरे में बनी हुई है, इससे आरबीआई द्वारा अपनी नीतिगत दरों में कटौती करने की पूरी संभावना है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफा-एमएल) ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि थोक महंगाई के घटने और इंडस्ट्रियल आउटलुक के निगेटिव बने रहने से आरबीआई पर वित्त वर्ष 2016-17 की 5 अप्रैल को होने वाली पहली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दर घटाने का दबाव है।
बाजार को 0.50 फीसदी कटौती की उम्मीद
महंगाई के नियंत्रण में आने तथा सरकार द्वारा अपनी राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर कायम रहने के मद्देनजर बाजार उम्मीद कर रहा है कि रिजर्व बैंक 2016-17 की अपनी पहली द्वीमासिक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में 0.50 फीसदी की कटौती कर सकता है। सरकार ने लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में 1.3 फीसदी तक की कटौती की है। इससे रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कमी की गुंजाइश बनी है। बैंकरों का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों से भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ सकती है, जबकि मुद्रास्फीति करीब पांच प्रतिशत पर है।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुशील मनहोट का कहना है कि मुद्रास्फीति कम होने की वजह से रिजर्व बैंक ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। एसोचैम को 0.25 फीसदी कटौती की उम्मीद है।
जेटली ने भी कटौती पर दिया जोर
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश में इस समय सस्ती ब्याज दर नीति की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि ऊंची ब्याज दरों से अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार राजकोषीय घाटा कम करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं पर टिकी हुई है और मुद्रास्फीति नियंत्रण में है। इस तरह से मुझे उम्मीद है कि यह क्रम बना रहेगा ताकि अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों के साथ हमारी अर्थव्यवस्था और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।
और सस्ते हो जाएंगे होम व कार लोन
आरबीआई यदि नीतिगत दरों में कटौती करता है तो होम व कार लोन और सस्ते हो जाएंगे। हाल ही में बैंकों द्वारा एक अप्रैल से ब्याज दर तय करने के नए नियम लागू करने से होम व कार लोन थोड़े सस्ते हुए हैं। अब आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में कटौती करने से होम व कार लोन और सस्ते हो जाएंगे।
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