मुंबई। देश की कुल आबादी का 69 फीसदी ग्रामीण इलाकों में रहता है। एक अध्ययन में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की तुलनामें ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी महंगाई से अधिक प्रभावित होती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अध्ययन के अनुसार पिछले पांच साल में मुद्रास्फीति से ग्रामीण इलाकों में रहने वाली 69 फीसदी आबादी अधिक प्रभावित हुई है। जून, 2016 को समाप्त 24 माह की अवधि के दौरान शहरी मुद्रास्फीति 9 से घटकर 5.3 फीसदी पर आई है जबकि ग्रामीण मुद्रास्फीति 10.1 से घटकर 6.2 फीसदी पर आई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति का अंतर करीब एक प्रतिशत का है। इसकी वजह ग्रामीण इलाकों में मूल और ईंधन मुद्रास्फीति का अधिक होना है। वित्त वर्ष 2015-16 में ग्रामीण मूल मुद्रास्फीति 6.7 फीसदी थी, जो शहरी क्षेत्रों में 4.8 फीसदी थी। ग्रामीण इलाकों में ईंधन मुद्रास्फीति जहां 6.8 प्रतिशत थी, वहीं शहरों में यह 2.7 फीसदी थी। पिछले वित्त वर्ष के दौरान सभी उप श्रेणियों मसलन स्वास्थ्य, शिक्षा, घरेलू सामान और सेवाएं, मनोरंज आदि की मुद्रास्फीति शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में अधिक थी।
क्रिसिल के अनुसार ग्रामीण इलाकों में जलाने की लकड़ी का इस्तेमाल 84 प्रतिशत आबादी करती है। शहरों में यह 23 फीसदी है। बीते वित्त वर्ष में जलाने की लकड़ी और लकड़ी की चिप्पियों की मुद्रास्फीति 7.4 फीसदी रही वहीं गोबर के उपलों की मुद्रास्फीति 10.8 प्रतिशत रही। 41 फीसदी ग्रामीण परिवार उपले का ईंधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह संख्या सिर्फ 7 फीसदी की है।
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