Story Highlightsउबेर ने दीदी चुक्सिंग को बेचा अपना चीन का कारोबारमर्जर के बाद कंपनी की संयुक्त वैल्यूएशन करीब 2.3 लाख करोड़ रुपएचीन में अमेरिकी कंपनियों के लिए कारोबार करना मुश्किलअब उबेर की नजर भारतीय बाजार पर टिकीभारत में उबेर 2 से 3 गुना तक ज्यादा करेगी इन्वेस्टमेंटनई दिल्ली। एप आधारित टैक्सी सर्विस देने वाली कंपनी उबेर ने चीन का अपना कारोबार दीदी चुक्सिंग को बेच दिया है। एनालिस्ट और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस मर्जर के बाद कंपनी ग्लोबल एक्सपेंशन के तहत भारतीय बाजार पर फोकस कर सकती है। दरअसल अमेरिका की दिग्गज कंपनियों के लिए चीन के बाजार पर कब्जा करना कभी आसान नहीं रहा है। उदाहरण के तौर पर चीन की कंपनियों से मात खाने के बाद ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन पर भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। मार्केट पर कब्जा जमाने की जंग का असली फायदा ग्राहकों को ही मिलेगा।यह भी पढ़ें- भारत में अपना पेमेंट वॉलेट शुरू करने की तैयारी में उबर, लोन और कार के लिए टाटा से किया करारटैक्सी कंपनियों में मची भारत के लिए होड़एक्सपर्ट्स का कहना है कि अबेर के लिए भारत अगला लड़ाई का मैदान है। उन्होंने कहा कि कंपनी चीन से बाहर हो चुकी है, ऐसे में भारत में निवेश 2-3 गुना बढ़ा सकती है। उबेर भारत की मार्केट लीडर ओला से मार्केट शेयर की जंग पहले ही शुरू कर चुकी है। उबेर सीईओ ट्रैविस कालानिक ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मर्जर से दोनों कंपनियों को नई ऊंचाई छुने में मदद मिलेगी। दूसरे देश में कारोबार फैलाने से लेकर सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी तक सभी पर काम कर सकेंगे।तस्वीरों में देखिए टैक्सी शेयरिंग के बारे मेंtaxi sharing taxi sharing taxi sharing taxi sharing taxi sharing taxi sharing taxi sharing ओला और उबेर का सीधा मुकाबलाओला के निवेशक रेहान यार खान ने कहा कि यह साफ है कि चीन में उबेर का मर्जर नहीं हुआ है बल्कि कंपनी ने अपना कारोबार बेच दिया है। उन्होंने कहा कि उबेर ने स्पष्ट रूप से चीन का बाजार खो दिया है। दीदी चुक्सिंग के पास पैसा है इसलिए वह अपना कारोबार का विस्तार करना चाहती है इसी कड़ी में यह गठबंधन हुआ है। पिछले साल भारत की सबसे बड़ी टैक्सी एग्रीगेटर कंपनी ओला में दीदी चुक्सिंग ने निवेश किया था। बेंगलुरु स्थित कंपनी में अपनी हिस्सेदारी के लिए 50 करोड़ डॉलर दे चुकी है। खान ने कहा कि यह मर्जर एसे समय पर हुआ है जब ओला मार्केट पर कब्जा बनाए रखने के लिए फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि बाजार पर बादशाहत की जंग में फायदा आम आदमी को भी मिलेगा।यह भी पढ़ें- ओला और उबर पर लगाम कसने की तैयारी, सरकार तय कर सकती है किराये की ऊपरी सीमा