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हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए आधार बेस्ड फेस ऑथेन्टिकेशन की तैयारी! 64 करोड़ स्मार्टफोन बनेंगे वोरिफिकेशन डिवाइस

यह नई प्रणाली उपकरणों के ईकोसिस्टम को पूरी तरह बदल देगी। वर्तमान में, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए विशिष्ट उपकरणों की जरूरत होती है। लेकिन, फेस ऑथेन्टिकेशन के साथ, यह सीमा खत्म हो जाएगी।

यह तकनीक किसी को भी आसानी से और कहीं भी अपनी पहचान सत्यापित करने की सहूलत देगी।- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK यह तकनीक किसी को भी आसानी से और कहीं भी अपनी पहचान सत्यापित करने की सहूलत देगी।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) जल्द ही उच्च-मूल्य वाले वित्तीय लेन-देन को सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठा सकता है। यूआईडीएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी कि एनपीसीआई आधार-आधारित चेहरा प्रमाणीकरण (फेस ऑथेन्टिकेशन) प्रणाली लागू करने पर विचार कर रहा है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में एक पैनल चर्चा के दौरान, यूआईडीएआई के उप महानिदेशक अभिषेक कुमार सिंह ने इस संभावित बदलाव पर प्रकाश डाला।

क्यों जरूरी है चेहरा प्रमाणीकरण?

सिंह ने जोर देकर कहा कि चेहरा प्रमाणीकरण को मल्टी-फैक्टर मूल्यांकन के रूप में इस्तेमाल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, यूआईडीएआई एक बुनियादी ढांचा है। यह सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है कि कौन कौन है? हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक डेटाबेस है। उन्होंने बताया कि यूआईडीएआई पहले ही इस दृष्टिकोण से सहमत है और आने वाले दिनों में इस संबंध में आधिकारिक घोषणा कर सकता है। उन्होंने अन्य बैंकरों से भी इस नई तकनीक को अपनाने की अपील की, इसे पहचान सत्यापित करने का सबसे आसान और तेज़ तरीका बताया।

64 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन बनेंगे सत्यापन उपकरण

यह नई प्रणाली उपकरणों के ईकोसिस्टम को पूरी तरह बदल देगी। वर्तमान में, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए विशिष्ट उपकरणों की आवश्यकता होती है (OTP-आधारित प्रमाणीकरण को छोड़कर)। लेकिन, चेहरा प्रमाणीकरण के साथ, यह सीमा समाप्त हो जाएगी। सिंह ने बताया कि तीन महीने पुरानी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 64 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन हैं। उन्होंने कहा कि जब हम चेहरा प्रमाणीकरण की बात करते हैं, तो आपका स्मार्टफोन ही आपका उपकरण बन जाता है, और इस प्रकार उपकरणों का ईकोसिस्टम अचानक 640 मिलियन (64 करोड़) से ऊपर पहुंच जाता है। इसका मतलब है कि यह तकनीक किसी को भी आसानी से और कहीं भी अपनी पहचान सत्यापित करने की सहूलत देगी, जिससे उच्च-मूल्य वित्तीय लेन-देन और भी सुरक्षित और सुगम हो जाएंगे।

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