अचल संपत्तियों से संबंधित डॉक्यूमेंट्स के रजिस्ट्रेशन के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य हो गया है। महाराष्ट्र में 1 अक्टूबर से ये नया नियम लागू भी कर दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि इस कदम से फर्जी लेनदेन और किसी अन्य व्यक्ति के रूप में पहचान बताकर धोखाधड़ी करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर लिया गया फैसला
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, ''महाराष्ट्र में नए नियमों के तहत आधार प्रमाणीकरण के बिना अचल संपत्ति (Immovable Property) से संबंधित किसी भी दस्तावेज का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। इनमें प्रॉपर्टी की बिक्री, खरीद, गिरवी और बंटवारे के दस्तावेज समेत 63 प्रकार के दस्तावेज शामिल हैं। ये फैसला राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर लिया गया और इसे राजपत्र में भी अधिसूचित कर दिया गया है।''
खत्म हो जाएगी फर्जी गवाहों और फर्जी पार्टियों से जुड़ी धोखाधड़ी
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, ''अचल संपत्ति के दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन राजस्व विभाग के तहत रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प विभाग द्वारा किया जाता है। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड जरूरी होने से अब फर्जी गवाहों और फर्जी पार्टियों से जुड़ी धोखाधड़ी खत्म हो जाएगी।'' मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस कदम से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में लोगों का दखल भी कम होगा, धोखाधड़ी रुकेगी और पूरी व्यवस्था ज्यादा कुशल और पारदर्शी बनेगी।
अगर आधार नहीं है तो क्या होगा
नए नियमों के तहत, आवेदकों को आधार नंबर या इस बात का सबूत देना होगा कि उन्होंने आधार के लिए आवेदन किया है। जिनके पास आधार नंबर नहीं है, उन्हें सरकार द्वारा जारी अन्य पहचान दस्तावेज और लेनदेन में शामिल व्यक्ति के साथ अपने रिश्ते का सबूत भी देना होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, जमा किए गए दस्तावेजों और पहचान की जानकारी के सत्यापन (Verification) के बाद ही लेनदेन पूरा किया जाएगा।
बच्चों और कुछ खास कैटेगरी के लिए विशेष प्रावधान
सरकार ने बच्चों और कुछ खास कैटेगरी के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। 18 साल से कम उम्र के लोगों के लिए, उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावकों की सहमति से आधार एनरोलमेंट के लिए आवेदन किया जाएगा। सरकार ने ये भी साफ किया है कि सिर्फ आधार नंबर न होने की वजह से किसी बच्चे या योग्य लाभार्थी के दस्तावेज के रजिस्ट्रेशन से इनकार नहीं किया जाएगा। राजस्व विभाग ने कहा कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पहचान के सत्यापन को मजबूत करना, किसी और की जगह खुद को पेश करने की गुंजाइश कम करना और संपत्ति से जुड़े लेनदेन में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाना है।
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