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मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच 5.25% पर स्थिर रह सकता है रेपो रेट, एक्सपर्ट्स ने गिनाई वजहें

भारत मौजूदा संकट से अछूता नहीं है। रुपया पहले ही 93 प्रति डॉलर के ऊपर बना हुआ है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ी है।

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Image Source : RBI मौजूदा संकट से अछूता नहीं है भारत

मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका की वजह से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अप्रैल में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। अर्थशास्त्रियों ने ये अनुमान जताया है। 12 से ज्यादा अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए सर्वे के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कमोडिटी की कीमतों में अस्थिरता और मुद्रा में तेज गिरावट ने नीतिगत परिदृश्य को जटिल बना दिया है। ऐसे में वृद्धि दर, मुद्रास्फीति पर आरबीआई के अनुमान और नीतिगत रुख पर गहरी नजर रहेगी। 

मौजूदा संकट से अछूता नहीं है भारत

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ''कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के इर्द-गिर्द अनिश्चितता को देखते हुए, आरबीआई द्वारा अप्रैल की नीति में यथास्थिति बनाए रखने और कोई भी अगला कदम उठाने से पहले मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर विचार करने की संभावना है।'' एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा कि रेपो रेट को स्थिर रखने की घोषणा करते समय आरबीआई अपनी टिप्पणी में काफी सावधानी बरतेगा। उन्होंने कहा, ''भारत मौजूदा संकट से अछूता नहीं है। रुपया पहले ही 93 प्रति डॉलर के ऊपर बना हुआ है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ी है।'' 

सोमवार को शुरू होगी मौद्रिक नीति समिति की बैठक

क्रिसिल की मुख्य अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि अगर मुद्रास्फीति एमपीसी के लक्ष्य के करीब रहती है, तो मौद्रिक नीति में इस झटके को नजरअंदाज करके ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी से अब तक रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। हालांकि, बैंक ने अगस्त, अक्टूबर और फरवरी, 2026 की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अप्रैल समीक्षा बैठक सोमवार से शुरू होगी और बुधवार को इसके नतीजे की घोषणा की जाएगी। ये 1 अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष 2026-27 का पहली एमपीसी मीटिंग होगी।

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