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50,000 से ज्यादा घर खरीदारों के लिए राहत भरी खबर, सुपरटेक की 16 अटकी परियोजनाएं इस कंपनी को सौंपी जाएगी

दिल्ली-एनसीआर सहित अन्य क्षेत्रों में घर खरीदारों को 12-15 वर्षों से अपने घरों का कब्जा नहीं मिला है। सालों से वह इसके इंतजार में हैं, जो लंबे समय से आर्थिक और भावनात्मक संकट से गुजर रहे हैं।

सुपरटेक लिमिटेड की 16 लंबित आवासीय परियोजनाओं के घर खरीदार इंतजार में हैं।- India TV Hindi
Image Source : SUPERTECH ऑफिशियल वेबसाइट सुपरटेक लिमिटेड की 16 लंबित आवासीय परियोजनाओं के घर खरीदार इंतजार में हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर सहित अन्य क्षेत्रों में सुपरटेक लिमिटेड की 16 लंबित आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी NCLAT के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें इन परियोजनाओं को सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन यानी NBCC को सौंपने की अनुमति दी गई थी। यह फैसला उन हजारों होमबायर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो 2010-2012 के बीच शुरू हुई इन परियोजनाओं में निवेश कर चुके हैं और पिछले 12-15 वर्षों से अपने घरों का कब्जा और निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रहे थे।  ANI की खबर में कहा गया है कि अनुमान के मुताबिक, इन 16 परियोजनाओं में लगभग 50,000 (कुछ रिपोर्टों में 49,748) आवासीय यूनिट्स शामिल हैं, जिससे करीब 50,000-51,000 परिवार प्रभावित थे। 

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश

सुपरटेक कंपनी इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में पूरी तरह असफल रही है।
कंपनी पर फंड डायवर्जन (धन के दुरुपयोग) के गंभीर आरोप लगे हैं।
होमबायर्स के हितों की रक्षा और समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करने के लिए NBCC को परियोजनाओं का प्रबंधन और निर्माण सौंपा जाना उचित है।
NBCC को अधिकतम 3 वर्षों के भीतर सभी परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतिम और बाध्यकारी होगा। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कोई अन्य अदालत, ट्रिब्यूनल या मंच हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा।

होमबायर्स के लिए उम्मीद की किरण

यह निर्णय उन होमबायर्स के लिए उम्मीद की किरण है जो लंबे समय से आर्थिक और भावनात्मक संकट से गुजर रहे थे। एनबीसीसी, जो पहले आम्रपाली जैसी अन्य अटकीं परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है, अब इन सुपरटेक प्रोजेक्ट्स को भी समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी निभाएगी। यह फैसला रियल एस्टेट क्षेत्र में होमबायर्स के अधिकारों और समयबद्ध डिलीवरी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई-एमएमआर सहित देशभर के शहरों में तमाम प्रोजेक्ट्स लंबे समय से अटके हैं। होम बायर्स ने अपनी गाढ़ी कमाई से भुगतान भी कर रखा है, लेकिन उन्हें आज भी कई साल बाद भी अपने सपनों के घर का इंतजार है। 

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