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CCI ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए डालमिया भारत के प्रस्ताव को मंजूरी दी, चेक करें डिटेल्स

डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड, डालमिया भारत लिमिटेड (DBL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडरी कंपनी है और डालमिया भारत लिमिटेड, डालमिया भारत ग्रुप की प्रमुख कंपनी है।

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Image Source : DALMIA BHARAT जयप्रकाश एसोसिएट्स पर बैंकों का 57,185 करोड़ रुपये का दावा

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने मंगलवार को कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए डालमिया भारत के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कंपनी दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत है। दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता के प्रावधानों के तहत, बोली प्रक्रिया में भाग लेने के लिए समाधान योजना प्रस्तुत करने को लेकर सीसीआई से मंजूरी एक प्रमुख आवश्यकता है। डालमिया भारत के अलावा, कई अन्य कंपनियों ने भी कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स (जेएएल) के अधिग्रहण में दिलचस्पी दिखाई है। कंपनी सीमेंट से लेकर रियल एस्टेट, होटल, फर्टिलाइजर्स प्लांट तक का संचालन करती है।

अडाणी समेत इन कंपनियों ने भी दिखाई दिलचस्पी

उद्योगपति गौतम अडाणी के नेतृत्व वाली अडाणी एंटरप्राइजेज, वेदांता ग्रुप, जिंदल पावर और पीएनसी इंफ्राटेक जैसी कंपनियों ने भी ऋणदाताओं की समिति (COC) के सामने अपनी-अपनी समाधान योजना प्रस्तुत करने की अनुमति को लेकर प्रतिस्पर्धा आयोग से संपर्क किया है। सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के अनुसार, प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत किसी भी पात्र समाधान योजना पर कर्जदाताओं की समिति के मतदान करने से पहले प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की मंजूरी लेना अनिवार्य है। डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड, डालमिया भारत लिमिटेड (DBL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडरी कंपनी है और डालमिया भारत लिमिटेड, डालमिया भारत ग्रुप की प्रमुख कंपनी है। डीबीएल मुख्य रूप से सीमेंट के निर्माण और बिक्री के कारोबार से जुड़ी है। 

जयप्रकाश एसोसिएट्स पर बैंकों का 57,185 करोड़ रुपये का दावा

सीसीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘‘आयोग ने डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के प्रस्तावित अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है।’’ इसी प्रक्रिया के तहत अडाणी ग्रुप ने भी सीसीआई के सामने एक आवेदन किया है। जेएएल को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण, इलाहाबाद पीठ के 3 जून, 2024 के आदेश के तहत कंपनी ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया में लाया गया था। ग्रुप के लोन के भुगतान में चूक के बाद इसे दिवाला कार्यवाही के अंतर्गत लाया गया। कर्जदाताओं का कंपनी के ऊपर 57,185 करोड़ रुपये का दावा है।

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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