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Hindi News पैसा बिज़नेस AI, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और बेहतर रनवे क्षमता के साथ सर्दियों के लिए तैयार दिल्ली एयरपोर्ट, घने कोहरे में भी होगी सुरक्षित लैंडिंग

AI, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और बेहतर रनवे क्षमता के साथ सर्दियों के लिए तैयार दिल्ली एयरपोर्ट, घने कोहरे में भी होगी सुरक्षित लैंडिंग

DIAL एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कोहरे के लिए विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) डेटा का इस्तेमाल करेगा, जो 85% कोहरे की प्रेडिक्शन एक्यूरेसी देने का दावा करता है।

delhi airport, delhi international airport limited, dial, delhi international airport, indira gandhi- India TV Paisa Image Source : GMR यात्रियों को मिलेगा भरोसेमंद, सेफ और आरामदायक ट्रैवल एक्सपीरियंस

GMR Aero द्वारा संचालित दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने नेक्स्ट-जेनरेशन AI सिस्टम, एडवांस्ड प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और बेहतर रनवे कैपेबिलिटी के साथ सर्दियों के लिए अपनी तैयारी को काफी मजबूत किया है, जिससे कम विजिबिलिटी वाली कंडीशन में भी ज्यादा सुरक्षित, ज्यादा कुशल फ्लाइट ऑपरेशन और पैसेंजर को कम से कम परेशानी हो। बताते चलें कि GMR Aero भारत के सबसे बिजी- दिल्ली एयरपोर्ट का ऑपरेटर है। इनमें, दिल्ली एयरपोर्ट का “एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर (APOC)” एक अहम भूमिका निभाता है। रियल-टाइम डेटा, प्रेडिक्टिव वेदर मॉडल और एयरसाइड ऑपरेशनल इनपुट को एक ही कमांड एनवायरनमेंट में इंटीग्रेट करके, APOC कोहरे के दौरान तेजी से फैसले लेने और ज्यादा सटीक रिसोर्स डिप्लॉयमेंट में मदद करता है।

कैसे मदद करेगा APOC

APOC, रनवे के इस्तेमाल को ऑप्टिमाइज करने, गेट और स्टैंड एलोकेशन को बेहतर बनाने, एयरक्राफ्ट सीक्वेंसिंग को प्रायोरिटी देने और सभी पार्टनर के साथ समय पर कम्युनिकेशन पक्का करने में मदद करता है। ये कोऑर्डिनेटेड, डेटा-ड्रिवन अप्रोच तेजी से विजिबिलिटी में उतार-चढ़ाव के दौरान भी ऑपरेशनल कंटिन्यूटी बनाए रखने की एयरपोर्ट की क्षमता को काफी बढ़ाता है। इसके अलावा, एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर, DIAL कोहरे पर विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) डेटा का इस्तेमाल करेगा, जो 85% कोहरे की प्रेडिक्शन एक्यूरेसी देने का दावा करता है। उम्मीद है कि इससे कोहरे का पहले से अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। इस शुरुआती जानकारी से एयरलाइंस, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और ग्राउंड टीमों के बीच प्रोएक्टिव ऑपरेशनल प्लानिंग और आसान तालमेल हो पाएगा, जिससे आखिर में देरी कम होगी और यात्रियों को ज़्यादा भरोसेमंद यात्रा का अनुभव मिलेगा।

IITM, IMD और DIAL ने मिलकर शुरू किया WiFEX

पुणे में मौजूद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी (IITM) ने इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) और DIAL के साथ मिलकर कोहरे पर एक दशक लंबा कोलेबोरेटिव रिसर्च प्रोग्राम- “विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX)” शुरू किया। तापमान, नमी, हवा की प्रोफाइल, एरोसोल, प्रदूषण के कण, रेडिएशन, कोहरे की बूंदों की माइक्रोफिजिक्स और विजिबिलिटी में बदलाव से जुड़ा डेटा LIDARs, सीलोमीटर, रेडिएशन सेंसर, एरोसोल काउंटर और रिमोट सेंसिंग टावर जैसे एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंट्स से इकट्ठा किया जाता है। इससे एडवांस्ड फॉग प्रेडिक्शन मॉडल (1 से 36 घंटे पहले) बनाने, घने कोहरे के पीछे की लोकल मेटियोरोलॉजी को समझने, सटीक विजिबिलिटी फोरकास्ट के ज़रिए एयरपोर्ट ऑपरेशन और सेफ्टी को बेहतर बनाने और कोहरे पर रिसर्च के लिए लंबे समय के डेटासेट बनाने में मदद मिलेगी। 

एयरसाइड अपग्रेड भी हुआ पूरा

इन टेक्नोलॉजी में तरक्की के अलावा, दिल्ली एयरपोर्ट ने एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के साथ मिलकर एक बड़ा एयरसाइड अपग्रेड भी पूरा किया है। रनवे 10/28 (दूसरा रनवे) का द्वारका वाला हिस्सा अब CAT III इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम से लैस हो गया है। इस सुधार के साथ, दिल्ली एयरपोर्ट के तीन रनवे (10/28, 11L/29R, और 11R/29L) अब दोनों सिरों पर CAT-III के हिसाब से हैं, जिससे घने कोहरे में भी सुरक्षित लैंडिंग हो सकेगी। नया अपग्रेड किया गया रनवे, मौजूदा रनवे के साथ मिलकर, कम विजिबिलिटी वाली स्थितियों में हर घंटे लगभग 30 लैंडिंग करा सकता है। इससे कोहरे से जुड़ी रिकवरी का समय 6 घंटे से लगभग 4 घंटे कम होकर सिर्फ 2 घंटे होने की उम्मीद है। इससे फ्लाइट शेड्यूल सुरक्षित रहेंगे, यात्रियों की परेशानी कम होगी और विजिबिलिटी कम होने पर भी सर्दियों में यात्रा आसानी से चलती रहेगी। 

यात्रियों को मिलेगा भरोसेमंद, सेफ और आरामदायक ट्रैवल एक्सपीरियंस

DIAL के CEO, विदेह कुमार जयपुरियार ने कहा, “कोहरा दिल्ली की सर्दियों का एक नैचुरल और जरूरी हिस्सा है, लेकिन DIAL में, हम ये पक्का करने के लिए कमिटेड हैं कि पैसेंजर पर इसका असर जितना हो सके कम से कम हो। इस साल, हमने नेक्स्ट-जेनरेशन AI टूल्स, एडवांस्ड प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) के डेटा से अपनी तैयारी को मजबूत किया है, जिससे हम कोहरे का पहले से ही अंदाजा लगा सकते हैं। हमने तीनों रनवे को दोनों सिरों पर CAT-III कम्प्लायंट बनाकर एयरसाइड कैपेबिलिटी को भी बढ़ाया है, जिसमें रनवे 10/28 के द्वारका साइड का हालिया अपग्रेड भी शामिल है। इससे कम विजिबिलिटी वाली कंडीशन में सेफ लैंडिंग हो सकेगी और घने कोहरे के दौरान भी ऑपरेशन को आसान बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि मौसम से जुड़ी दिक्कतों को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है, लेकिन ये अपग्रेड हमारी प्लानिंग करने, रिस्पॉन्ड करने और तेज़ी से रिकवर करने की एबिलिटी को बहुत बेहतर बनाएंगे। हमारा फोकस पूरे सर्दियों के मौसम में सभी पैसेंजर के लिए एक भरोसेमंद, सेफ और आरामदायक ट्रैवल एक्सपीरियंस पक्का करने पर है।” 

इन लेटेस्ट टेक्नोलॉजी में सुधार और बेहतर रनवे क्षमता के साथ, दिल्ली एयरपोर्ट ने भारत के सबसे एडवांस और भविष्य के लिए तैयार एविएशन हब के तौर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है, जिससे मुश्किल सर्दियों के कोहरे के मौसम में सुरक्षित, पहले से पता और पैसेंजर के लिए आसान ऑपरेशन पक्का हो सके।

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