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9 से 10 राज्यों में दिख सकता है अल नीनो का कहर, किसान के हितों की सुरक्षा के लिए कृषि मंत्री ने दिए खास निर्देश

कृषि मंत्रालय के बयान के अनुसार, चौहान ने राज्यों को संवेदनशील जिलों की स्पष्ट पहचान कर फसल के हिसाब से वैकल्पिक योजनाएं पहले से तैयार रखने को कहा है।

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Image Source : AFP भारत को कैसे प्रभावित करता है अल नीनो

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को अल नीनो से ज्यादा प्रभावित होने वाले 9 से 10 राज्यों में जिला प्रशासन, कृषि विभागों, कृषि विज्ञान केंद्र और अन्य विभागों के साथ समन्वित बैठकें करने के निर्देश दिए। मंत्री ने खरीफ फसल सत्र 2026 की तैयारियों को लेकर साप्ताहिक समीक्षा बैठक के दौरान बारिश की कमी वाले जिलों के लिए अग्रिम आकस्मिक योजना तैयार करने पर जोर दिया और कपास एवं दलहन का रकबा बढ़ाने की जरूरत बताई। 

संवेदनशील जिलों की पहचान कर वैकल्पिक योजनाएं बनाने के निर्देश

कृषि मंत्रालय के बयान के अनुसार, चौहान ने राज्यों को संवेदनशील जिलों की स्पष्ट पहचान कर फसल के हिसाब से वैकल्पिक योजनाएं पहले से तैयार रखने को कहा है, ताकि मौसम संबंधी चुनौतियों की स्थिति में किसानों को तुरंत विकल्प, सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। कृषि मंत्री ने कहा, "हर संवेदनशील जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति तैयार की जानी चाहिए, जिसमें जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, मिश्रित फसल और वैकल्पिक फसल के तरीके पर विशेष ध्यान दिया जाए।" 

कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर

इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों तक 'वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित शांत, विश्वसनीय और समाधान-उन्मुख संदेश' पहुंचाने की है, न कि डर पैदा करने वाली सूचनाएं। बैठक में अलग-अलग फसलों के लिए लक्ष्य, बुवाई की प्रगति और राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई, जिसमें कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर रहा। चौहान ने उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों, उपयुक्त बीज चयन, मिश्रित फसल, मल्चिंग (मिट्टी में नमी बनाए रखने की तकनीक) और नमी संरक्षण को बढ़ावा देने की बात कही। 

भारत को कैसे प्रभावित करता है अल नीनो

बताते चलें कि भारत में होने वाली ज्यादातर खेती आज भी मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। अल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर का पानी गरम हो जाता है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून पर काफी बुरा असर पड़ता है। अल नीनो की वजह से मानसून कमजोर पड़ जाता है या देरी से आता है। ऐसे में देश के प्रभावित क्षेत्रों को कम बारिश या सूखा जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, अल नीनो की वजह से प्रभावित क्षेत्रों में कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी बारिश हो जाती है, जबकि कुछ इलाके लंबे समय तक बारिश का इंतजार ही करते रह जाते हैं।

खरीफ फसलों पर पड़ता है सबसे बुरा असर

जून से सितंबर के बीच उगाई जाने वाली खरीफ फसलों को मानसून की बारिश की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। लेकिन, अल नीनो की वजह से मानसून प्रभावित होता है और बारिश की कमी की वजह से फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है।

अल नीनो की वजह से प्रभावित होने वाली फसलें

  1. धान
  2. मक्का
  3. सोयाबीन
  4. दालें
  5. कपास
  6. गन्ना
  7. मूंगफली

धान को मानसून की बारिश की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। पानी की कमी की वजह से ये फसल सूखकर बर्बाद हो जाती हैं। जबकि, बाकी फसलों को भी ज्यादा पानी की जरूरत होती है। अल नीनो न सिर्फ मानसून को प्रभावित कर बारिश पर रोक लगा देता है, बल्कि ये मिट्टी में मौजूद नमी को भी खत्म कर देता है।

भारत के किन राज्यों पर पड़ता है अल नीनो का सबसे ज्यादा प्रभाव

  1. महाराष्ट्र का मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र
  2. गुजरात के तटीय क्षेत्र
  3. राजस्थान
  4. मध्य प्रदेश
  5. छत्तीसगढ़
  6. उत्तरी कर्नाटक
  7. उत्तर प्रदेश का पूर्वी हिस्सा और बुंदेलखंड

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