1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. मछुआरों को नाव खरीदने पर मिलेगी 70% सब्सिडी, कास्ट नेट और गिल नेट पर 90 प्रतिशत सब्सिडी देगी हिमाचल सरकार

मछुआरों को नाव खरीदने पर मिलेगी 70% सब्सिडी, कास्ट नेट और गिल नेट पर 90 प्रतिशत सब्सिडी देगी हिमाचल सरकार

सब्सिडी योजना के तहत, पात्र जलाशय मछुआरों को नाव खरीदने के लिए 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता मिलेगी।

Fishermen, subsidy for Fishermen, Fishermen subsidy in himachal pradesh, himachal pradesh- India TV Hindi
Image Source : PIXABAY मछुआरों को नाव खरीदने के लिए मिलेंगे 35,000 रुपये

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए एक खास सब्सिडी स्कीम की शुरुआत की है। राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार इस स्कीम के तहत, मछुआरों को मछली पकड़ने वाली नावों और मछली पकड़ने के उपकरणों के लिए व्यापक सब्सिडी योजनाएं शुरू की हैं।

नाव खरीदने के लिए सरकार देगी 35,000 रुपये की सब्सिडी

हिमाचल प्रदेश की इस सब्सिडी योजना के तहत, पात्र जलाशय मछुआरों को नाव खरीदने के लिए 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता मिलेगी। हर नाव की कीमत 50,000 रुपये है, जिसमें से राज्य सरकार 70 प्रतिशत यानी 35,000 रुपये का खर्च उठाएगी और बाकी 30 प्रतिशत यानी 15,000 रुपये लाभार्थी को देने होंगे। इस योजना का उद्देश्य गोबिंद सागर, पोंग डैम, चमेरा, रंजीत सागर और कोल डैम जैसे बड़े जलाशयों में मछली पकड़ने वाले बेड़े को आधुनिक बनाना है, जिससे सुरक्षा, काम करने की क्षमता और मछुआरों के लिए कमाई के मौके बेहतर होंगे। 

सब्सिडी पाने के लिए क्या हैं शर्तें

सब्सिडी पाने के लिए, आवेदक का किसी रजिस्टर्ड प्राइमरी फिशरीज कोऑपरेटिव सोसाइटी का एक्टिव सदस्य होना जरूरी है और उसने एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 50 दिन मछली पकड़ने का काम किया हो।

कास्ट नेट और गिल नेट पर मिलेगी 90 प्रतिशत सब्सिडी

एक और अहम पहल के तहत, राज्य सरकार ने सब्सिडी वाली फिशिंग गियर योजना भी शुरू की है, जिसमें कास्ट नेट और गिल नेट पर 90 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना के तहत, नदी में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को 3,000 रुपये कीमत वाले कास्ट नेट सिर्फ 300 रुपये में मिलेंगे और राज्य सरकार 2,700 रुपये की सब्सिडी देगी। 

5,000 रुपये वाले गिल नेट के लिए मछुआरों को देने होंगे सिर्फ 500 रुपये

इसी तरह, जलाशय में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को 5,000 रुपये कीमत वाले गिल नेट सिर्फ 500 रुपये देकर मिलेंगे, जबकि राज्य सरकार 4,500 रुपये की सब्सिडी देगी। इस पहल का मकसद अच्छी क्वालिटी के फिशिंग गियर को सस्ता बनाना, टिकाऊ मछली पकड़ने के तरीकों को बढ़ावा देना और राज्य भर की नदियों और जलाशयों में मछली उत्पादन बढ़ाना है।

मछुआरों के पास होना चाहिए मत्स्य विभाग द्वारा जारी वैध लाइसेंस 

इस योजना के तहत, 4,000 सक्रिय नदी मछुआरों को कास्ट नेट और 3,000 सक्रिय जलाशय मछुआरों को गिल नेट डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सिस्टम के जरिए मिलेंगे। पात्र लाभार्थियों के पास मत्स्य विभाग द्वारा जारी कम से कम लगातार 3 सालों का वैध मछली पकड़ने का लाइसेंस होना चाहिए।

ये भी पढ़ें

वेज थाली 4% और नॉन-वेज थाली 9% हुई महंगी- प्याज, तेल, गैस की कीमतों ने बढ़ाई लागत

Latest Business News