बुधवार को कैबिनेट ने तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए 10,000 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता को मंजूरी दे दी। ये सहायता अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस के लिए ATF (विमान ईंधन) की कीमतों को स्थिर करने के लिए दी गई है। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट की वजह से ईंधन की बढ़ती कीमतें एविएशन सेक्टर को बुरी तरह से प्रभावित कर रही हैं। इस फैसले की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण ATF की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम का उद्देश्य एयरलाइन कंपनियों और यात्रियों पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को कम करना है।
2.5 गुना तक महंगा हो चुका है एटीएफ
अंतरराष्ट्रीय ATF की कीमतें मार्च 2026 में 60.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर मई 2026 में 142 रुपये प्रति लीटर हो गईं, जो लगभग 2.5 गुना ज्यादा है। किसी भी एयरलाइन कंपनी के कुल परिचालन खर्च में एटीएफ का खर्च लगभग 40% होता है। इतना ही नहीं, ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले समय में एटीएफ का खर्च कुल खर्च का 60% तक भी पहुंच जाता है। इसलिए एटीएफ की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने एयरलाइन कंपनियों और तेल कंपनियों के साथ-साथ आम यात्रियों को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है।
OMCs को ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में दी जाएगी ये मदद
ये मदद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के माध्यम से OMCs को ब्याज-मुक्त अग्रिम (Advance) के रूप में दी जाएगी। ये सुविधा उन सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस के लिए उपलब्ध होगी, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह की सेवाएं देते हैं। हालांकि, घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतें सीमित कर दी गई थीं। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय रूटों के लिए एयरलाइंस को 'आयात समता कीमतों' (Import Parity Prices) पर ही एटीएफ खरीदना पड़ रहा है, जिससे उन पर लागत का बोझ बढ़ गया है।
कीमत स्थिर रखने के लिए 36 महीनों तक लागू रहेगी मदद
नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, और व्यय विभाग के प्रतिनिधियों वाली एक निगरानी समिति का गठन किया जाएगा, जो इस योजना के कार्यान्वयन, दावों के सत्यापन और ऑडिट की देखरेख करेगी। कीमत स्थिर रखने के लिए ये मदद 36 महीनों तक लागू रहेगी, जिसमें हर साल समीक्षा करने का प्रावधान होगा, या तब तक जब तक दी गई अग्रिम राशि पूरी तरह से वसूल न हो जाए, इनमें से जो भी पहले हो।
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